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4 दिसंबर एक आखिरी ? अवसर कांग्रेस को राजपरिवार से मुक्ति दिलाने का

अतुल गंगवार- पत्रकार, लेखक लंबे समय तक सहारा समय बिहार झारखंड से जुड़े रहें हैं। वर्तमान में फिल्म लेखन कर रहें है।

आखिर कांग्रेस में राहुल की ताजपोशी की तारीख घोषित हो ही गयी। कांग्रेस वर्किंग कमिटी ने अगले अध्यक्ष के चुनाव  तिथियों  की घोषणा कर दी है। 1 दिसंबर को चुनाव की घोषणा होगी, 4 दिसंबर तक नामांकन भरे जा सकेंगे। 5 दिसंबर को उनकी जांच होगी । 5 को ही सही पाये गये नामांकन की लिस्ट ज़ारी होगी। 11 दिसंबर तक नाम वापिस लिए जा सकेंगे। 11 को ही उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी होगी। 16 दिसंबर को यदि आवश्यकता पड़ी तो वोटिंग होगी  और 19 दिसंबर को वोटो की गिनती और विजयी उम्मीदवार की घोषणा कर दी जायेगी। देखने में तो ये लोकतांत्रिक प्रक्रिया द्वारा कांग्रेस के नये अध्यक्ष का चुनाव दिखायी देता है। लेकिन कांग्रेस में चल रहे वंशवाद को देखते हुए हम ये भी कह सकते हैं कि इस प्रक्रिया के माध्यम से वर्तमान उपाध्यक्ष को अध्यक्ष बनाने की कवायद है । अभी चारो तरफ से आ रहीं खबरो को देखते हुए इस बात से इंकार नही किया जा सकता कि राहुल गांधी ही अगले कांग्रेस अध्यक्ष होंगे।

दुर्भाग्य है कि देश को आजाद कराने का संपूर्ण श्रेय लेने वाली कांग्रेस में आज एक भी ऐसा नेता नही है जो कांग्रेस को इस वंशवाद से आजाद कराने में सक्षम हो। देश पर लंबे समय तक राज करने वाली पार्टी आज संसद में प्रमुख विपक्षी दल कहलाने लायक भी नही रही है। सब जानते हैं कि ऐसा किसलिए हो रहा है। कांग्रेस की वर्तमान अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में (हालांकि मोर्चा प्रत्यक्ष रुप से राहुल गांधी संभालते हैं, कभी कभी प्रियंका का सहयोग भी उन्हें मिलता रहा है ) कांग्रेस की ये दुर्दशा हुयी है फिर भी वहां कोई ऐसा नेता नही है जो इस राजपरिवार के चंगुल से कांग्रेस को बाहर निकालने का प्रयास कर सकें।

आज जितना आवश्यक देश के लिए मोदी का प्रधानमंत्री होना है, उससे ज़्यादा आवश्यक एक मजबूत विपक्ष का होना भी है। केन्द्र सरकार को चुनौती देने, उसे ठीक राह पर चलने के लिए मजबूर करने के लिए ताकतवर विपक्ष की कमी आज खल रही है। ऐसा विपक्ष जो ना केवल नैतिक रूप से मजबूत हों बल्कि उसकी सोच में देश का विकास, आम आदमी का विकास सर्वोपरि हो।  जिस तरह के मुद्दे, जिस तरह की रणनीति आज कांग्रेस सिर्फ भाजपा को चुनाव हरवाने के लिए उठा रही है उनसे वर्तमान में तो देश को कोई उम्मीद नही दिखायी दे रही। देश को बहुत उम्मीद है कांग्रेस से, कांग्रेस  यानि उस विचार से जिस पर चलकर लाखों लोगों ने देश की आजादी के लिए संघर्ष किया । आज उस विचार को जीवित रखना है तो कांग्रेस को एक ओर आज़ादी की लड़ाई लड़नी होगी। इस बार उसे स्वयं अपने से लड़ना होगा।

अब एक मौका आया है । औपचारिक ही सही नए अध्यक्ष के लिए निर्वाचन की प्रक्रिया शुरू हुयी है। अब कांग्रेस के नेताओं को ये भी भली भांति ध्यान आ गया होगा कि गांधी परिवार का नाम उनके लिए सत्ता में बने रहने की कोई गारंटी नही है। तो क्यों ना इस बार कांग्रेस के नेता लीक से हटकर सोंचे और कांग्रेस को प्रोपराइटरशिप से निकालकर, एक परिवार की जागीर छवि से बाहर निकालकर जनता की पार्टी बनाने की दिशा में काम करें. सोनिया गांधी पर दबाव बनाये कि वो पार्टी के लिए राहुल गांधी की जगह किसी योग्य व्यक्ति के हाथ पार्टी की कमान (मनमोहन सिंह जी जैसे नही) सौंपे और कांग्रेस को एक बार फिर खड़ा करने में योगदान करें।

देश आज एक मजबूत विपक्ष की तलाश में है, ये देश के हित में हैं। उम्मीद है कांग्रेस इस दिशा में सोचेगी और योग्य व्यक्ति के हाथ में कांग्रेस का नेतृत्व सौंपेगी। यही देश और स्वयं कांग्रेस के भी हित में  होगा। ध्यान रहे हो सकता है ऐसा मौका फिर ना मिले।

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