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विकास करें विनाश नही

 
अनुपमा झा- स्वतंत्र पत्रकार, सहारा समय में लंबे समय काम किया। वर्तमान में पुणे में रहती हैं।
आज देश के तमाम बड़े शहर बढ़ते हुए प्रदुषण की समस्या से परेशान हैं। हाल ही में देश की राजधानी दिल्ली प्रदुषण के कारण ठहर सी गयी थी। जनजीवन असमान्य हो गया था। ऐसे में एक बार फिर इस प्रदुषण से निपटा जाये इसपर देशव्यापी चर्चा शुरू हो गयी। प्रदुषण केवल दिल्ली की समस्या नही है। आज जिस प्रकार से शहरों का कंक्रीटिकरण हो रहा है उससे ये समस्या हर जगह दिखायी देनी शुरू हो गयी है। सड़कों पर दौड़ते वाहन विकास नही विनाश का संकेत दे रहें हैं।  पर्यावरण की कीमत पर मनुष्य अपना अंधाविकास करने में लगा हुआ है। पेड़ काटे जा रहे हैं और इमारते खड़ी की जा रही हैं। वो दिन दूर नही जब हरियाली हमारे आने वाली पीढ़ी को सिर्फ तस्वीरों में दिखाई देगी। तो हमें संभलना चाहिए, पर्यावरण की सुरक्षा हमारा दायित्व है इसका ध्यान रखना चाहिए।
पुणे का मौसम बहुत अच्छा माना जाता है। हालांकि अब यहां भी कंक्रीट के जंगल उगते जा रहे हैं।  लेकिन अगर हम आने वाली समस्या को ध्यान में रखकर यहां का विकास करें तो इस शहर को प्रदुषण से मुक्त रख सकते हैं। लेकिन यहीं कुछ ऐसी भी जगह हैं जहां आने के बाद आपको शहर की आपाधापी से दूर शांति का अनुभव होता है। जैसे पुणे शहर के बीचो बीच स्थित कोरेगांव पार्क।
कोरेगांव पार्क अपने खूबसूरत प्लानिंग के लिए जाना जाता है। हरे भरे पेड़ो के बीच एक ही जगह पर शानदार बंगले अपनी सर्वाधिक संख्या के लिए जाने जाते हैं। रात्रि में ये जगह आपको गोवा में होने का आभास देती है। इसकी वजह यहां खुले रेस्त्रां, पब और शापिंग आउटलेट्स हैं।
यह जगह पर्यटकों को भी आकर्षित करती है क्योंकि यहीं आचार्य रजनीश का स्थापित किया गया ओशो आश्रम भी स्थित है। अपने शानदार वातावरण के चलते ये जगह दक्षिणी मुंबई के बाद सबसे मंहगी संपत्तियों में से एक है।
आज जिस तरह से पुणे शहर माल्स, बिल्डिंग और IT आफिसों के शहर में विकसित हो रहा है। हमें आसपास पेड़ कम होते दिखायी दे रहे हैं। ऐसे में कोरेगांव पार्क को जिस प्रकार हराभरा रखा गया है वो पर्यावरण को सुरक्षित रखने का सराहनीय प्रयास है। बारिश की बूंदे जब धरती पर गिरती है तो मिट्टी की सोंधी सी महक हमें अपनी धरती से जोड़ने का काम करती है। चिड़ियों की चहचहाहट वातावरण में मधुर संगीत घोलती है। इससे पहले कि ये सब बातें अतीत का हिस्सा बन जायें हमें अपने आसपास के वातावरण को सुरक्षित बनाना होगा। अधिक से अधिक पेड़ लगाने होंगे, जिन पर पंछी अपना घर बनायें। उनकी चहचहाहट हमारी सुबह को खुशनुमा बनायें। आज कोरेगांव के उदाहरण से प्रकृति की महत्ता को समझने की आवश्यकता है। तो चलिए संकल्प लें कि हम पर्यावरण संवर्धन के लिए कार्य करेंगे और अपने पुणे को स्वच्छ, स्वस्थ बनायेंगे। अगर हम ऐसा करेंगे तो अपनी आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करेंगे और कहीं आज चूक गये तो वो दिन दूर नही स्वच्छ वायु के सिलेंडर अपनी पीठ पर ढोते हुए दिखायी देंगे।

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