You are here
Home > breaking > चली चली रे पतंग मेरी-अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव 2018

चली चली रे पतंग मेरी-अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव 2018

दीपक दुआ आज देश के जाने माने फिल्म पत्रकारों में से एक हैं। स्वभाव से घुमंतु दीपक एक कामयाब लेखक,स्तंभकार भी हैं।

 

गुजरात यानी गरबा महोत्सव, गुजरात यानी रण-उत्सव और वही गुजरात यानी अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव। हर साल मकर सक्रांति यानी 14 जनवरी के दिन पूरे गुजरात में पतंगें उड़ाई जाती हैं जिसे यहां उत्तरायण पर्व के नाम से जाना जाता है। उत्तरायण पर आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव को देखना अपने-आप में एक दिलकश और यादगार अनुभव है। गुजरात सरकार पिछले 28 साल से यह आयोजन कर रही है और साल-दर-साल यह और बड़ा व भव्य होता जा रहा है।

इस बार 7 से 14 जनवरी तक चलने वाले इस महोत्सव में गुजरात के 290, 18 अन्य राज्यों के 96 और भारत से बाहर के 44 देशों के 149 पतंगबाज अपनी अनोखी पतंगों और पैंतरेबाजी से लुभाने आए हैं। अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव के चलते गुजरात में न सिर्फ सैलानियों की आवक बढ़ी है बल्कि यहां रोजगार और कमाई के अवसर भी बढ़े हैं। एक स्टडी के अनुसार गुजरात में पतंगें और उनसे जुड़ा सामान बनाने का बाजार तकरीबन 600 करोड़ का हो चुका है और करीब सवा लाख लोग प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इससे जुड़ कर लगभग तीन सौ करोड़ की कमाई कर रहे हैं।

हथेली के आकार की छोटी-सी पतंग से लेकर 20 मीटर व्यास वाली विशाल गोलाकार पतंग। कोई अकेला ही फुर्र-फुर्र पतंग उड़ा रहा था तो कहीं एक-एक पतंग को पांच-सात लोग भी मिल कर नहीं संभाल पा रहे थे। किस्म-किस्म के साइज और रंगों वाली पतंगें। खुद मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने भी पतंगबाजी में हाथ आजमाया और बोले कि ये पतंगें असल में सूर्य नारायण को अर्घ्य के तौर पर समर्पित करते हुए आसमान में चढ़ाई जाती हैं। ये पतंगें अलग तरह के मैटीरियल से बनाई जाती हैं और इनकी डोर भी अलग होती है।

पतंग महोत्सव में ही शिल्प और खानपान का बाजार भी लगा हुआ है। सिर्फ अहमदाबाद ही नहीं, बल्कि अब तो यह पतंग महोत्सव पालनपुर, जाम नगर, सूरत, द्वारका, सापुतारा, राजकोट, वडोदरा, पावागढ़, वलसाड, गांधीधाम जैसी जगहों पर भी मनाया जाता है।

 

Leave a Reply

Top