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सत्ता की चाह में दर-दर भटक रही है इनेलो, बसपा से नहीं हुआ तो कांग्रेस से भी गठबंधन कर सकती है ? — जवाहर यादव

जवाहर यादव
कुछ दिन पहले भाजपा की आलोचना करने के चक्कर में इनेलो के प्रदेश अध्यक्ष अशोक अरोड़ा ने कहा कि इनेलो के कारण भाजपा ने उनके राज में सत्ता सुख भोगा। उनके इस कथन से कम से कम यह स्थापित हो गया कि इनेलो की नजर में सत्ता सुख भोगने का साधन है। अब सुना है कि उसी सुख को पाने के लिए इनेलो बहुजन समाज पार्टी से गठबंधन का जुगाड़ कर रही है।
दरअसल यह हरियाणा के इतिहास का सच है कि इनेलो ने कभी अकेले चुनाव लड़कर सत्ता पाई ही नहीं, उसे हमेशा भाजपा के गठबंधन से ही राज मिला है, ( कोई भी ग़ैर कोंग्रेसी सरकार तभी बनी है जब भाजपा ने सहयोग किया ) और ये भी सच है कि एक बार सत्ता की चाबी हाथ में आते ही इनेलो ने अपने साथियों का भरोसा खोया है। वैसे भी इनेलो से पहले भाजपा दूर गई, फिर उनके अकाली दल वाले पगड़ी बदल भाई भी साथ छोड़ गए, ऐसे में किसी ऐसे को ही वे ढूंढ सकते हैं जो हरियाणा से दूर का हो और इनेलो की फितरत से वाकिफ ना हो। अलग-थलग पड़ी इनेलो डूबने से पहले हाथ-पांव मार रही है।
इस बात को इनेलो के नेता स्वीकार कर चुके हैं कि उनकी पार्टी में अकेले सत्ता में आने का दम नहीं है। अभय चौटाला जी की जुबान पर गठबंधन की बात कई बार आ चुकी है। लेकिन मुझे चिंता ये है कि भाजपा, अकाली से साथ छूटने के बाद कहीं बहुजन समाज पार्टी भी इनेलो के साथ चलने से मना ना कर दे। उस सूरत में इनेलो की सत्ता की चाह पूरी करने के लिए एक ही संभावना बचेगी कि वे कांग्रेस से गठबंधन कर लें। सत्ता सुख पाने के लिए इनेलो इतनी बेचैन है कि वह अपने धुर विरोधी कांग्रेस के साथ जाने से भी नहीं चूकेगी। वैसे यह भी सच है कि चौधरी देवीलाल और ओमप्रकाश चौटाला जी ने अपनी चुनावी राजनीति की शुरूआत कांग्रेस के चुनाव निशान पर ही की थी। देखा जाए तो कांग्रेस ही इनेलो का मूल दल है। दो साल पहले राज्यसभा चुनाव में भी दोनों दल एक ही उम्मीदवार (जो पराजित हुए) के साथ थे जिसे गांधी परिवार का आशीर्वाद प्राप्त था और जो इंदिरा गांधी के तो बहुत करीबी व्यक्ति थे।
बसपा के साथ भी इनेलो पहले एक बार गठबंधन कर चुकी है जो एक साल भी नहीं चला था। 1998 के लोकसभा चुनाव में ये दोनों दल साथ लड़े लेकिन एक साल में ही इनेलो-बसपा गठबंधन टूट गया और 2000 में इनेलो ने भाजपा से गठबंधन कर सरकार बनाई। हालांकि भाजपा उस सरकार में शामिल नहीं हुई और इनेलो की मनमानी वाली सरकार के चलते अगले चुनाव में यह दल बुरी तरह हारकर सत्ता से बाहर हो गई।
लेकिन ये सभी दल चाहे जो भी अनैतिक कोशिश कर लें, हरियाणा की जनता इनके किसी स्वरूप को नहीं स्वीकारेगी क्योंकि जहां ये दल स्वार्थ, भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद के लिए जाने जाते हैं वहीं भाजपा ने ‘सबका साथ, सबका विकास’ की राह पर चलकर समाज के अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का फायदा पहुंचाया है। जहां ये सभी दल अपने परिवार और अपने जिलों के लिए बाकियों का हक मारते रहे हैं, वहीं भाजपा सरकार का परिवार हर नागरिक और क्षेत्र पूरा हरियाणा है। जनता ने सब सरकारों का हाल देख लिया है और वह समझ चुकी है कि ‘हरियाणा एक हरियाणवी एक’ सिर्फ और सिर्फ पूर्ण बहुमत वाली भाजपा सरकार के हाथों से ही संभव है।

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