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अंतर्राष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन में पहुंचे गृहमंत्री राजनाथ सिंह

बोल बिंदास: दिल्ली के रोहिणी में स्थित स्वर्ण जयंति पार्क में 11वां अन्तरराष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन आयोजित किया गया, इस चार दिवसीय अन्तरराष्ट्रीय महासम्मेलन का रविवार 28 अक्टूबर को चौथा दिन था, जिसके मुख्य अतिथि केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह थे। जिन्होंने इस महासम्मेलन के समापन सभा को संबोधित किया। गृह मंत्री ने सभा को संबोधित करते हुए आर्य समाज और स्वामी दयानंद के आदर्शों के बारे में बताते हुए कहा कि आर्य समाज की भूमिका लम्बे समय से भारत हीं नही पूरे विश्व कल्याण के लिए जानी जाती है। स्वामी दयानंद सरस्वती के वाक्य को याद करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की ताकत सांस्कृतिक एक जुटता और भारतीयता है।
इसलिए भारत की सांस्कृतिक एक जुटता मजबूत होनी चाहिए। भारत केवल अपने लिए नहीं पूरे मानव समाज और विश्व के लिए ताकतवर बनना चाहता है। क्योंकि भारत के त्रृषि मुनियों ने वसुधैव कुटुम्बकम का उद्घोष किया और उन ऋ​षियों ने केवल भारत के कल्याण की कामना नहीं की बल्कि सम्पूर्ण विश्व और संम्पूर्ण मानव जाति के कल्याण की कामना की थी। गृह मंत्री श्री सिंह ने आर्य महासम्मेलन की तुलना राष्ट्रीय स्वयं सेवक से की और सम्मेलन की सराहना करते हुए कहा— यहां आकर ऐसा लगा कि सम्मेलन में उपस्थित सभी लोग आध्यात्मिक भाव में डुबे हुए हों.ये सब स्वामी दयानंद सरस्वती के आदर्शों की देन है। साथ हीं गृह मंत्री श्री सिंह ने अपने भाषण में मंच पर शांति पाठ करने वाली भारतीय कन्याओं के साथ अफ्रिकी बच्चो द्वारा प्रस्तुत किये गए शांति पाठ की तारिफ की।
संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि यह आर्य महा सम्मेलन समाप्त हो रहा है लेकिन जिस उद्देश्य से आर्य समाजी कार्य कर रहे हैं, उन्हें उनके उद्देश्य को प्राप्त करने से दुनिया की कोई ताकत नही रोक पाएगी। आर्य समाज के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि आर्य समाज एक ऐसा क्रांतिकारी विचार है जो सोए हुए मनुष्य को भी जगा देगा। और इसका एक सूत्र है कि हम तो आर्य है हीं सारे विश्व को हम आर्य बनाना चाहते हैं। दयानंद के बारे में बोलते हुए कहा कि उनके मन और विचार इतने उच्च थे कि कल्पना करना मुश्किल है। दयानंद के आदर्श अपने से पहले दूसरों के कल्याण के बारे में सोचने का है और भारत की सबसे बड़ी विशेषता यही है। यहीं भारतीयता और भारतीय संस्कृत है।
स्वामी दयानंद सरस्वति को दुरदर्शी बताते हुए उन्होंने कहा कि मानव कल्याण के लिए उन्होंने पर्यावरण के शुद्धी के लिए यज्ञ का सिलसिला बहुत पहले हीं शुरू कर दिया था।
आर्य समाज के छह हजार शिक्षण संस्थाओं के बारे में जानकर खुशी व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि आज भी आर्य समाज प्रभावी तरिके से राष्ट्र और समाज कल्याण लिए अपनी भूमिका का निर्वाह कर रहा है. और वेदों के प्रचार में उन्होंने कहा कि जो ज्ञान विज्ञान गणित हमारे वेदो में है दुनिया की किसी पुस्तक में नहीं है। पाइथागोरस प्रमेय, अनिश्चितता का सिद्दांत सब हमारे वेदों और संस्कृत में आज भी मौजूद हैं। संबोधन के अंत में श्री सिंह ने आयोजनकर्ताओं और सम्मेलन में उपस्थित लोगों को विश्वास दिलाया कि स्वामी दयानंद सरस्वती की 200वीं जयंति जो 2024 में आने वाली है, उस वर्ष से हर साल महासम्मेल आयोजित करने में सहयोग को  लेकर वे प्रधानमंत्री मोदीजी से बात करेंगे।
 इस संबंध में इस 11वें अन्तरराष्ट्रीय महासम्मेलन का आयोजन सार्वदेशिक आर्य प्र​तिनिधि सभा की तरफ से किया गया था जिसमें दुनियां के 32 देशों से आर्यसभा प्रति​निधि शामिल रहे।
 इस महासम्मेलन के समापन समारोह के मंच पर गृह मंत्री राजनाथ सिंह के साथ—साथ केंद्रीय मंत्री सतपाल सिंह जी, गंगा प्रसाद जी (राज्यपाल, सिक्किम), सुरेश चंद जी आर्य, सांसद सुबोधानंद जी , महाशय धर्मपाल आर्य जी, विजेंद्र गुप्ता ( नेता प्रतिपक्ष, दिल्ली), सुरेंद्र आर्य जी, प्रकाश आर्य जी , आदि उपस्थित रहे और सबने सभा के संबोधन में दयानंद के आदर्शों के बारे में विचार किया और उसको आगे बढाने और समाज कल्याण हेतु कार्या करने की बात की।
इस आर्य महासम्मेलन का उद्देश्य मानव समाज और पुरी दुनिया में सभी प्रकार के समस्याओं को ध्यान में रखते हुए किया गया जिसमें मुख्य पर्यावरण की समस्या, नारी शिक्षा और उनके अधिकार , जाति –पात अंधविश्वास, असंतुलित जनसंख्या की समस्या, आर्य समाज की छह हजार संस्थाओ के संरक्षण और समाज को संगठित और एक जुट रखना है। और पुरे विश्व और मानव समाज को यह संदेश देना कि आर्य समाज सभी जाति धर्म के लोगो की क्रांति है, जिसका उद्देश्य मानव तथा राष्ट्र कल्याण करना और संगठीत रखने के साथ—साथ भारत को विश्व गुरू बनाना है।
इस अंतरराष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन के पहले दिन (गुरुवार) का उद्घाटन राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने किया था। दूसरे दिन योग गुरु बाबा रामदेव, हिमाचल प्रदेश के गवर्नर आचार्य देवव्रत, असम के राज्यपाल जगदीश मुखी, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय महासचिव, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री, नितिन गडकरी द्वारा संबोधित किया गया था।

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