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अभी भी हिन्दुओं का उपहास करने वाली फ़िल्में बन रही हैं- कैलाश खेर

फिल्म इंडस्ट्री कोई इंडस्ट्री नहीं है, बल्कि वहां पर आपको अपने रिश्तों को लेकर काम मिलता है। इंडस्ट्री तो वह है कि जहाँ पर लोग सुख दुःख में साथ हो, मगर फिल्म इंडस्ट्री में ऐसा कुछ नहीं है और आप कई लोगों से उम्मीद नहीं कर सकते कि वह देश के मुद्दों पर देश के मन के हिसाब से बात करेंगे!” प्रख्यात गायक कैलाश खेर ने यह बेबाक विचार शब्द उत्सव द्वारा आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किए। वरिष्ठ टीवी पत्रकार और एंकर अनुराग पुनेठा ने कैलाश खेर से डीजिटल माध्यम द्वारा बातचीत की। यह बातचीत शब्द उत्सव के फेसबुक पेज पर लाइव प्रसारित किया गया।

सिलेक्टिव चुप्पी पर जबाव देते हुए कैलाश खेर ने कहा कि जो भी सिलेक्टिव चुप्पी है उसके लिए अतीत की गलतियाँ जिम्मेदार हैं। कैलाश खेर ने कहा कि हमारे यहाँ संसाधन तो आ गए हैं, मगर फेसबुक और व्हाट्सएप पर क्या लिखना है यह नहीं पता! मतलब युवाओं को यह जरा भी नहीं पता है कि आखिर उन्हें क्या लिखना है क्योंकि जो हमें शिक्षा मिली है वह देश के साथ जोड़ने वाली न होकर देश तोड़ने वाली है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जो नई शिक्षा नीति आई है, उसके कारण बच्चों को देश की जड़ों से जोड़े जाने वाली शिक्षा बनेगी। और फिर हर कोई अपने मन की बात कह पाएगा। उन्होंने आधुनिक विकास के लिए केवल भारतीय शिक्षा को उत्तरदायी बताया। उन्होंने कहा कि कुछ हजार वर्ष पूर्व तक हमारे पास ज्ञान था तो चला कहाँ गया?

उन्होंने कहा कि हमारी आधुनिक शिक्षा पद्धति ने हमें अपनी संस्कृति और धर्म पर शर्म करना सिखाया, यही कारण है कि बड़े बड़े कलाकार अपनी संस्कृति पर बात करने में हिचकते हैं। उन्होंने पारिवारिक व्यवस्था पर बल देते हुए कहा कि यह बहुत जरूरी है कि परिवार एक साथ रहें, युवाओं से उन्होंने आचरण ऐसा करने के लिए कहा, जिससे वह एक रहें।

यह पूछे जाने पर कि उन्हें सच बोलने में भय नहीं लगता तो उन्होंने कहा कि वह डर से ऊपर हैं, और इस इंडस्ट्री में आपको क्या चाहिए यह आप पर निर्भर करता है। उन्होंने राम के आदर्शों पर बात करते हुए कहा कि राम इसलिए आदर्श हैं क्योंकि जब वह वध करने जा रहे होते हैं तब भी वह यही प्रार्थना करते हैं कि उनके शत्रुओं को सद्गति दें। फिर उन्होंने भारतीय मूल्यों के खिलाफ बनने वाली फिल्मों पर बात करते हुए कहा कि अभी भी हिन्दुओं का उपहास करने वाली फ़िल्में बन रही हैं। उन्होंने कहा कि बड़े अपने बच्चों को कान्वेंट में पढ़वा रहे हैं, और संस्कृति से दूर कर रहे हैं। जब आप बच्चे को संस्कृति से दूर करेंगे तो ग्रीस गॉड आदि को ही तो मानेंगे।

फिल्मों में हिन्दुओं को नीचा दिखाने वाली प्रवृत्ति पर  उन्होंने कहा कि हिन्दुओं को तो बलात्कारी दिखाया जाता है, मगर ईसाई और मुसलमानों को हमेशा श्रेष्ठ दिखाया जाता है। इस पर कैलाश खेर ने कहा कि हमें अलग होना है और वेदों एवं भारतीय मूल्यों के अनुसार काम करना है। उन्होंने अपनी बात बताते हुए कहा कि निराश नहीं होना है क्योंकि शुरू में उन्होंने शाहरुख खान के लिए गाना गया, मगर वह गाना कहाँ स्वाहा हुआ पता नहीं चला! फिल्म रीलीज हुई तो मेरी जगह किसी और का नाम था। इसलिए उन्होंने कहा कि यहाँ पर मोह नहीं करना क्योंकि मोह के वशीभूत होकर वह खुद भी आत्महत्या के लिए चले गए थे। परन्तु बच गए। फिर उन्होंने भारतीय आहार के विषय में बात करते हुए कहा कि यदि हम दूध और दही और देसी खाना खाते थे तब तक हम ठीक रहे, जब से रसोई बिगड़ा तब से सब कुछ बिगड़ गया।

इस डिजिटल चर्चा का आयोजन शब्द उत्सव द्वारा उसके फेसबुक पेज पर किया गया था। इस साक्षात्कार को हज़ारों की संख्या में दर्शकों ने देखा। शब्द उत्सव इससे पूर्व पिछले पांच वर्षों से अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेला में वैचारिक चर्चाओं का आयोजन करता आ रहा है। अब लॉकडाउन के समय फेसबुक पेज पर कई महत्वपूर्ण चर्चाओं का आयोजन करा चुका है। शब्द उत्सव की पिछली डिजिटल चर्चाओं में प्रसिद्ध अभिनेता और गीतकार पीयूष मिश्र, बॉलीवुड गायिका प्रतिभा सिंह बघेल, केंद्रीय संस्कृति राज्य मंत्री श्री प्रहलाद पटेल, प्रसिद्ध लेखक अमीश त्रिपाठी एवं प्रख्यात लोक गायिका श्रीमती मालिनी अवस्थी आदि शामिल रही हैं।  

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