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कैरी ऑन गिप्पी ग्रेवाल

दीपक दुआ
लेखक वरिष्ठ फिल्म समीक्षक व पत्रकार हैं। 1993 से फिल्म–पत्रकारिता में सक्रिय। मिजाज से घुमक्कड़। सिनेमा विषयक लेख, साक्षात्कार, समीक्षाएं व रिपोर्ताज लिखने वाले दीपक कई समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, न्यूज़ पोर्टल आदि के लिए नियमित लिखते हैं और रेडियो व टी.वी. से भी जुड़े हुए हैं।

 

पंजाबी एंटरटेनमैंट इंडस्ट्री के चमकते सितारे गिप्पी ग्रेवाल अब अपनी अगली फिल्म ‘कैरी ऑन जट्टा 2’ लेकर आए हैं जो 2012 में आई उन्हीं की फिल्म ‘कैरी आॅन जट्टा’ सीरिज़ का हिस्सा है। हाल ही में दिल्ली आए गिप्पी से यह बातचीत हुई-

‘कैरी ऑन जट्टा 2’ के बारे में बताएं ?

-यह फिल्म भी पिछली वाली फिल्म की तरह एक फैमिली एंटरटेनर होगी जिसमें आपको भरपूर मनोरंजन मिलेगा। पिछली वाली फिल्म में हीरो अपने परिवार के साथ रहता है लेकिन हीरोइन को एक ऐसा लड़का चाहिए होता है जो अनाथ हो और हीरो अनाथ होने की एक्टिंग करता है। जबकि इस फिल्म में हीरो अनाथ है लेकिन हीरोइन को परिवार वाला लड़का चाहिए सो, वह अपने लिए एक नकली फैमिली का जुगाड़ करता है और इसी से कॉमेडी उत्पन्न होती है।

इस फिल्म का दूसरा पार्ट में आने में छह साल कैसे लग गए ?

-असल में पहले दो-तीन साल तक तो हमें यह महसूस ही नहीं हुआ कि इस फिल्म का अगला पार्ट बनाया जाए क्योंकि वो फिल्म पुरानी ही नहीं हो रही थी। लोग उसे खूब एन्जॉयकर रहे थे। उसके बाद हमने इसकी कहानी ली, प्लानिंग  हुई, शूटिंग शुरू हुई और अब यह बन कर आपके सामने है।

पंजाबी में एंटरटेंनिंग फिल्में ही ज़्यादा बन रही हैं। पंजाबी विरासत और संस्कृति पर गंभीरता से बात करने वाली फिल्में क्यों नहीं ?

-ऐसा नहीं है। मैंने खुद एक फिल्म डायरेक्ट की थी ‘अरदास’ जो अलग तरह की थी। उसे बहुत पसंद किया गया। एक फिल्म ‘1984’ आई थी उसे भी लोगों ने बहुत पसंद किया। उसे देख कर तो लोग रोते थे। मेरा यह मानना है कि फिल्में सिर्फ अच्छी होती हैं या खराब होती हैं। जो फिल्म अच्छी है, वह चाहे किसी भी जॉनर की हो, वह चलेगी ही चलेगी।

इधर एक ‘सिक्ख सेंसर बोर्ड’ बनाने की बात हुई है। क्या यह कदम सही है ?

-मुझे इसमें कुछ गलत नहीं लगता। हो सकता है कि जो लोग सेंसर बोर्ड में बैठे हुए हैं उनमें से किसी को सिक्ख धर्म की, सिक्खों की संवेदनाओं की उतनी समझ न हो। इसलिए अगर कोई संस्था ऐसा कुछ करती है जिससे विवाद कम करने और चीजों को सही तरह से सामने लाने में मदद मिलती हो तो मुझे नहीं लगता कि यह गलत है।

युवा वर्ग आपको बहुत प्यार करता है। उनके लिए कोई खास संदेश ?

-युवाओं से मैं कहना चाहूंगा कि दोस्तों, जिंदगी को भरपूर जियो, मजे करो लेकिन नशे से दूर रहो। जिंदगी खुद एक नशा है, उसी का आनंद लो।

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