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गणेश चतुर्थी पर गणेश जी की स्थापना करते वक़्त ध्यान रखे ये बातें, होंगे वारे न्यारे

हिमानी जौली ‘अज्ञानी’ प्रख्यात ज्योतिषी है। आपके लेख देश की जानी मानी पत्रिकाओं में छपते रहते है। आप विभिन्न न्यूज़ चैनलो पर अध्यातम एवं ज्योतिष से जुड़ी चर्चाओं में भाग लेती रहती हैं। ज्ञानवान हैं लेकिन उपनाम ‘अज्ञानी ‘से जानी जाती हैं।गणेश चतुर्दशी के अवसर पर उनकी कलम से भक्तों के लिए विशेष सलाह एवं सुझाव।
हर वर्ष भाद्रपक्ष के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन सभी भक्तजन अपने घर व दुकानों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। कुछ लोग अज्ञानवश या लापरवाही में ऐसी गलतियां कर जाते हैं जो नहीं करनी चाहिए। आइए जानते हैं ऐसी ही कुछ बातें।
प्रतिमा लाते समय ध्यान रखें ये बात
गणपति प्रतिमा चाहे घर में स्थापित करनी हो या दुकान पर, यह जरूर ध्यान रखें कि उनके दोनों पैर जमीन का स्पर्श करते हुए हो। इससे घर में सुख-समृद्धि तथा स्थिरता आती है।
कहां कैसी प्रतिमा स्थापित करें
घर में गणेशजी की बैठी हुई तथा दुकान या कार्यस्थल पर खड़े गणपति की प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए।
बाईं तरफ होनी चाहिए गणेशजी की सूंड
जब भी घर में गणपति की मूर्ति या चित्र लाएं तो उनकी प्रतिमा बाएं हाथ की तरफ ही होनी चाहिए। दाएं हाथ वाले गणेशजी की प्रतिमा तंत्र प्रयोगों के लिए ही शुभ मानी गई हैं, मंदिरों में भी उनकी स्थापना विशेष प्रयोग हेतु ही की जाती है।
सफेद या सिंदूरी रंग की हो प्रतिमा
घर में सफेद या सिंदूर रंग की ही प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए। अन्य किसी रंग के नहीं। इनकी आराधना से सभी कार्य सिद्ध होते हैं।
वास्तु दोष भी होगा दूर
घर का जो भी हिस्से वास्तु के अनुसार ठीक न हो, वहीं घी में सिंदूर मिलाकर गणपति स्वरूप स्वास्तिक दीवार पर बनाने चाहिए। इससे धीरे-धीरे वास्तु दोष का प्रभाव समाप्त हो जाता है।

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