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अपने कर्म ठीक करो, जनता EVM ठीक कर देगी

बोल बिंदास

दिल्ली के विधानसभा चुनावों में अभूतरपूर्व विजय के बाद आम आदमी पार्टी के ‘मालिक’ अरविंद केजरीवाल (मालिक इसलिए की इस पार्टी में केजरीवाल के अलावा किसी की नही चलती) की राजनैतिक महत्वकांक्षा आसमां की बुलंदियों को छू रही थी. वो देश की राजनीति में विपक्ष के सर्वमान्य नेता बनने की ओर बढ़ रहे थे. इसी महत्वकांक्षा को पूरा करने के लिए वो मोदी के खिलाफ खड़े हो गये. दिल्ली मे जो अच्छा हो उसका श्रेय उनको और कुछ भी गलत हो रहा हो तो वो मोदी की साजिश, मोदी की चाल उन्हें नीचा दिखाने की. जिस कॉंग्रेस के भ्रष्टाचार के खिलाफ जनता ने उन्हे बहुमत दिया था उस लड़ाई को निर्णायक मोड़ पर पंहुचाने के बजाये केजरीवाल ने मोदी खिलाफ मोर्चा खोल दिया.

दिल्ली की जनता मोदी बनाम केजरीवाल की लड़ाई में पिस रही थी. उसे समझ में ये नही आ रहा था कि क्या हो रहा है? वो केजरीवाल से चुनाव में किए गए वादों के बारे में पूछती तो जवाब मिलता क्या करें, कैसे करें? मोदी नही करने दे रहा है. LG के साथ उनकी लड़ाई सर्वविदित थी. हर काम को अपने तरीके से करना, नियम, कायदे, कानून को ताक पर रखना और अगर कोई सही बात समझायें तो ये कहना कि देखिए हमें काम नही करने दिया जा रहा है.

खैर दिल्ली तो संभल ही नही रही थी लेकिन महत्वकांक्षाओं के चलते केजरीवाल पंजाब और गोवा जा पंहुचे. जहां इन्हे उम्मीद थी कि सत्ता विरोधी लहर के चलते उनकी पार्टी सत्ता में आ जायेगी. पर पंजाब और गोवा की जनता उनकी कार्यशैली से वाकिफ हो चुकी थी इसलिए उसने पंजाब में कांग्रेस पर भरोसा जताया. आम आदमी पार्टी जीत से कोसो दूर रह गयी. उसका वोट प्रतिशत अकाली दल से भी कम रहा. गोवा में पार्टी के सभी उम्मीदवारों (एक को छोड़कर) की जमानत जब्त हो गयी.

उत्तरप्रदेश में बसपा की करारी हार से बौखलायी मायावती ने अपनी हार का ठीकरा EVM मशीन पर फोड़ दिया. लगे हाथ केजरीवाल ने भी ये मुद्दा लपक लिया और मांगकर डाली कि चुनाव मतपत्रों के द्वारा होने चाहिए. उ्न्हे शायद ये ध्यान नही रहा देश में चुनाव सरकार नही चुनाव आयोग कराता है जो स्वतंत्र संस्था है. ये आरोप चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर संदेह खड़ा करने वाला था. वैसे भी केजरीवाल देश के संविधान,न्याय व्यवस्था में कितना यकीन रखते हैं ये सबको पता है.

दिल्ली के नगर निगम चुनावों में केजरीवाल को सफलता की बहुत उम्मीद थी. लेकिन राजौरी गार्डन विधानसभा उपचुनाव में उसकी खाली करी सीट पर जो नतीजे आये उसने उनके पैरो तले से ज़मीन ही खिसका दी. आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार की जमानत ज़ब्त हो गयी. बीच निगम चुनाव में आये इस परिणाम ने केजरीवाल को हिला दिया और वो निगम चुनावों के आने वाले परिणामों को भांप गये. उन्हेे लगा कि कही ऐसा ना हो कि निगम चुनावों में भी उन्हें करारी मात मिले. तो एक बार फिर से उन्होंने अजीबो गरीब ब्यान देने शुरू कर दिये. कभी कहते बीजेपी और कांग्रेस वाले बिजली ट्रांसफार्मर से तेल चोरी करते हैं, कभी कहते कि अगर बीजेपी निगम चुनावों में वापिस आ गयी तो बिजली के दाम बढ़ा देगी, कभी कहते कि अगर दिल्ली में डेंगू और चिकनगुनिया फैला तो इसके ज़िम्मदार वो नही होंगे और निगम चुनावो के एक्ज़िट पोल में भाजपा को भारी बहुमत मिलने के आसार दिखते ही आखिरी पैतरा कि देखो मैने तो पहले ही कहा था कि EVM मशीन खराब हैं, उन्हे सेट किया गया है.

केजरीवाल साहब अब तो आप होश में आ ही जाओ. जनता बार बार आपको समझाने की कोशिश कर रही है कि आप जिस राह पर चल रहे हो उसकी मंज़िल कहां है. वो राह ठीक नही है. दूसरे को गाली देने से अच्छा है कि आप अपने काम में ध्यान दो. अपनी हार का ठीकरा मशीन पर फोड़ने के बजाय उस इंसान के बारे में सोचो जिसने आपको 70 में से 67 सीटें दी थीं. किसी ने इस अभूतपूर्व जीत पर संदेह नही किया था. कांग्रेस 0 और भाजपा 3 पर सिमट गयी थी. सबने जनता के निर्णय को स्वीकार किया था. तब आपने भी ये नही कहा था कि EVM खराब हैं. जब आपकी बारी में सब ठीक था तो अब आप जनता के फैसले का सम्मान कीजिए और उन कारणों को ढूंड़िये जिसकी वजह से आप तेजी से अलोकप्रिय होते जा रहे हैं. लोकतंत्र में जनता से बड़ा कोई नही है अगर वो गलती करना जानती है तो उसे सुधारना भी. वो सजा देना जानती है तो सुधरने वाले को माफ करना भी. अब भी वक्त है सुधर जाओ वरना कहीं ऐसा ना जनता जब आपका हिसाब करे तो आपके खाते में कुछ ना आये. तो अपने कर्म ठीक करिेए जनता आपकी EVM मशीन ठीक कर देगी.

अतुल गंगवार

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