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डायलॉग इनिशिएटिव फाउंडेशन ने रंग दे बसंती कार्यक्रम का आयोजन किया

नई दिल्ली | डायलॉग इनिशिएटिव फाउंडेशन ने  रंग दे बसंती कार्यक्रम का आयोजन 23 मार्च 2018 ( शाम 5.00 बजे ) नई दिल्ली स्थित मावलंकर हॉल, काँस्टीट्यूशन क्लब में किया गया। जिसमें अमर शहीद भगत सिंह पर एक नाट्य मंचन ऱाष्ट्र शहीद प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि हरियाणा के महामहिम राज्यपाल माननीय प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी की गरिमामई उपस्थिति रही । कार्यक्रम में हरियाण सरकार के कृषि मंत्री श्री ओमप्रकाश धनखड़, राष्ट्रीय सिख सगत के महासचिव श्री डॉ अवतार सिंह शास्त्री, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता और संचार विश्वविधालय के कुलपति प्रोफेसर बी के कुठियाला , मुख्यमंत्री हरियाणा के मीडिया सलाहकार श्री अमित आर्य, एवं टी.वी. कलाकार श्री सुमित वत्स आदि विशेष तौर पर मंच मौजूद रहे। मुख्य अतिथि हरियाणा के महामहिम राज्यपाल माननीय प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी, हरियाण सरकार के कृषि मंत्री श्री ओम प्रकाश धनखड़ ने दीप प्रज्वलित करके कार्यक्रम की शुरूआत करी।

कार्यक्रम की शुरूआत के दौरान हरियाणा के महामहिम राज्यपाल माननीय प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने दर्शको का उत्साह वर्धन किया। महामहिम प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने शहीद भगत सिंह को याद करते हुए कहा कि भगत सिंह देश के प्रेरणा श्रोत हैं। शहीद भगत सिंह को सिर्फ कार्यक्रमों के माध्यम से ही नहीं बल्कि हम सबको भगत सिंह के विचारो को अपने जहन में रखना है। देश सर्वोपरि है। जिस तरह भगत सिंह ने 23 साल की उम्र में देश के लिए शहीद हो गए यह हम सबके लिए बहुत बड़ी सीख है। इसके साथ ही महामहिम राज्यपाल ने स्वामी विवेकानन्द सिंह के विचारों को बताया। इसके बाद मंच से हरियाणा के कृषि मंत्री श्री ओम प्रकाश धनखड़ शहीद भगत सिंह को याद करते हुए कहा कि आज शहीद भगत सिंह को सिर्फ एक दिन न याद करके शहीद भगत सिंह को अपने दैनिक जीवन में याद रखना होगा। तभी देश के प्रति सच्ची राष्ट्र भक्ति जगेगी। इसके साथ ही मंत्री श्री ओम प्रकाश धनखड़ ने बताया कि हरियाणा के प्रत्येक गांवों में शहीद लोगों के नाम एक पट्ट के माध्यम से गांव के शुरूआती मार्ग में लगाया जा रहा है। इससे हरियाणा के हर एक गांव से जितने भी शहीद हुए उनके नाम उस पट्ट में लगाने का काम हरियाणा सरकार कर रही है। जो कि 30 जून 2018 तक पूरा कर लिया जाएगा।

रंग दे बसंती : आज पूरा विश्व मानता है कि भारत सर्वाधिक नौजवान राष्ट्र है और सदा की भांति इस राष्ट्र में विश्व का नेतृत्व करने , विश्व को परम कल्याण के रास्ते पर ले जाने का सामर्थ्य है । यही वह राष्ट्र है जिसने हज़ारों वर्ष के अपने इतिहास में शौर्य और पराक्रम के साथ सौहार्द्र एवं समन्वय का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया । भारत के वीरों ने विदेशी आक्रांताओं से युद्ध और संघर्ष कर विजय प्राप्त की किंतु वे कभी बर्बर हत्यारे नहीं बने । भारत के वीरों ने पूरी दुनिया में अपनी बहादुरी के साथ साथ अपनी उदारता से भी अपनी महानता सिद्ध की है । मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम से लेकर महान अशोक, समुद्रगुप्त, पृथ्वीराज, विवेकानंद, आज़ाद, बिस्मिल और भगत सिंह तक भारत मां के सपूतों की वीरता के साथ उदात्त चरित्र की गौरवशाली परंपरा है । आज भारत के नौजवान विश्व के प्रत्येक कोने में अपनी प्रतिभा को स्थापित कर रहे हैं और समूची दुनिया इस राष्ट्र की ओर आशा भरी निगाहों से देख रही है ।

इस आशा और सकारात्मकता से भरे समय में भी कुछ विघटनकारी ताकतें वैचारिक वैमनस्यता के अपने षड़यंत्र के तहत देश के युवाओं को नकारात्मकता की अंधी राह पर धकेलने का निरंतर प्रयास कर रहे हैं । राष्ट्र विमुख विचार के वाहक इन अपनों में शामिल शत्रुओं ने पहले राष्ट्र के प्रति गौरव के भाव को हीनता और पराभव के इतिहास के साथ नष्ट करने की कोशिश की। इन परोक्ष शत्रुओं ने देश की नौजवान पीढ़ी को राष्ट्र गौरव वीरों के आदर्शों से भी दूर करने की भरसक कोशिश की है । इसी षड़यंत्र के तहत भगत सिंह जैसे राष्ट्र भक्त स्वतंत्रता सेनानी को एक आयातित वैचारिक रोग का शिकार दिखाने की कोशिश की गई । आज जब विश्व से खारिज की जा चुकी विघटनकारी वैचारिक षड़यंत्रकारी  ताकतें देश के सकारात्मक वातावरण को प्रदूषित करने की कोशिश कर रही हैं तब राष्ट्र चेतना से ओतप्रोत युवाओं की भूमिका इस साजिश को नाकाम करने में अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है ।

इसी प्रयास के अन्तर्गत राष्ट्र-विचार के व्यापक संवाद के लिए समर्पित डायलॉग इनिशिएटिव फाउंडेशन राष्ट्र शहीद भगत सिंह के शहादत दिवस को युवाओं के लिए एक नई प्रेरणा दृष्टि से “रंग दे बसंती” नामक संवाद अभिव्यक्ति प्रस्तुत कर रहा है । भगत सिंह, बिस्मिल, अशफ़ाक , राजगुरू , सुखदेव और आजाद जैसे महान क्रांतिकारियों ने राष्ट्र यज्ञ में अपनी आहुति देते वक्त जिन गीतों को प्रेरणा गीत बनाया उनमें बिस्मिल का लिखा रंग दे बसंती गीत बहुत महत्वपूर्ण है । इस गीत में बिस्मिल ने क्रांतिकारियों में जोश भरने के लिए भगवान शिव और महाराणा प्रताप के नामों का भी उल्लेख किया है ।

अत्यंत रोचक बात यह है कि इस गीत का एक हिस्सा भगत सिंह ने पूरा किया । भगत सिंह के ऱाष्ट्र के प्रति समर्पण और राष्ट्र चेतना से भरे हृदय को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में युवा पीढ़ी के लिए प्रसंगिक बनाने और आयातित विचार के नाम पर उनकी छवि पर डाले गए भ्रमजाल को हटाने के लिए इस संवाद – अभिव्यक्ति में एक नाटक ( राष्ट्र-शहीद भगत सिंह लौट आया ) तथा राष्ट्र चेतना से ओतप्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां हुई । भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस पर 23 मार्च 2018 ( शाम 5.00 बजे )  को यह कार्यक्रम नई दिल्ली स्थित मावलंकर हॉल, काँस्टीट्यूशन क्लब में किया गया।

 

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