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दिल्ली हाईकोर्ट ने COAI को लगाई फटकार- कहा जियो के खिलाफ बयानबाजी उचित नही

बोल बिंदास, दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने राजन मैथ्यूज और COAI द्वारा रिलायंस जियो के खिलाफ पूर्व में की गई बयानबाजी को पक्षपातपूर्ण और अपमानजनक पाया है – साथ ही यह आदेश पारित किया है कि वे रिलायंस जियो के खिलाफ किसी भी अपमानजनक वक्तव्य से बचें।

जियो ने COAI के महानिदेशक राजन मैथ्यूज और COAI संस्था पर मानहानि और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने का मुकादमा दायर किया था। जिस पर आज दिल्ली हाई कोर्ट में न्यायमूर्ति योगेश खन्ना की अदालत में सुनवाई हुई।

वरिष्ठ वकील और पूर्व अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने रिलायंस जियो का पक्ष रखते हुए कोर्ट में दलील दी कि COAI का सदस्य होने के बावजूद जब से रिलायंस जियो ने मार्किट में प्रवेश किया है (सितंबर, 2016) तभी से राजन मैथ्यूज व्यक्तिगत तौर पर और सीओएआई के प्रतिनिधि के तौर पर COAI के बहुमत वाले सद्स्यो यानी – भारती एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया – के निहित स्वार्थों को बढ़ावा दे रहे हैं। वे  लगातार दुर्भावनापूर्ण, झूठे, मानहानि करने वाले और अपमानजनक बयान देते रहे हैं। शुरू में इनका लक्ष्य रिलायंस जियो के बाजार में प्रवेश को विफल करने का था। बाद में जियो के  विकास को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई जिससे पुरानी टेलीकॉम कंपनियों के वाणिज्यिक हितों की रक्षा की जा सके।

सितंबर 2016 के बाद से ही राजन मैथ्यूज और सीओएआई जियो के खिलाफ बयानबाजी कर रहे थे। उन्होंने जियो को बैकडोर ऑपरेटर करार दिया था। धनकुबेर की कंपनी बताते हुए उस पर इंडस्ट्री में एकाधिकार करने की साजिश रचने और रेगुलेटर के साथ सांठ गांठ करने के आरोप भी लगाए थे। दिल्ली हाई कोर्ट ने रिलायंस जियो के खिलाफ की गई इस बयानबाजी पर कड़ा रूख अपनाया। उच्च न्यायालय ने इसे रिलायंस जियो के खिलाफ पहली नजर में असंतोषजनक और अपमानजनक माना। जब राजन मैथ्यूज और सीओएआई के वकील ने इन बयानों को ‘उचित बयान’ बताया तो उच्च न्यायालय ने कहा कि ऐसे बयानों को उचित नही माना जा सकता।

उच्च न्यायालय ने राजन मैथ्यूज और सीओएआई को रिलायंस जियो के खिलाफ किसी भी अपमानजनक वक्तव्य देने से रोकने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई अगस्त 2018 में होगी।

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