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चंद्र ग्रहण 2018: चन्द्र ग्रहण कब होता है, जानिए चंद्र ग्रहण से जुड़ी रोचक बातें

इस साल का पहला चंद्र ग्रहण 2018 माघ शुक्ल पक्ष पूर्णिमा के दिन यानी बुधवार 31 जनवरी 2018 को चंद्र ग्रहण लगेगा। यह चंद्र ग्रहण खग्रास अर्थात पूर्ण चंद्रग्रहण होगा।

चंद्र ग्रहण का समय

पूर्ण चंद्र ग्रहण को भारत के हरेक हिस्से में देखा जा सकता है। चंद्र ग्रहण शाम पांच बजकर 18 मिनट पर शुरू होगा और मुख्य चन्द्र ग्रहण सूर्यास्त के बाद लगभग छह बजकर 20 मिनट पर शुरू होगा। एक घंटे के बाद लगभग शाम सात बजकर 25 मिनट पर ग्रहण फीका पडने लगेगा और चंद्र ग्रहण का मुख्य भाग  08:42 मिनट पर समाप्त हो जायेगा। वहीं दिल्ली में चंद्र ग्रहण का समय  5:55 मिनट से 8:41 मिनट (शाम) तक रहेगा। जबकि इलाहाबाद में चन्द्रोदय शाम को 5:40 बजे से ही चंद्र ग्रहण दिखाई देगा जबकि लखनऊ में 5:41 पर चंद्र ग्रहण लगा ही चंद्रमा दिखाई देगा।

चंद्र ग्रहण का नक्षत्र

इस चंद्र ग्रहण का स्पर्श पुष्य नक्षत्र में होगा, लेकिन इस चंद्र ग्रहण का समापन श्लेषा नक्षत्र में होगा।  इस प्रकार पुष्य एवं श्लेषा दोनों नक्षत्रो के जातकों को और कर्क राशि वालों को प्रभावित करेगा।

चंद्र ग्रहण का राशि पर प्रभाव

मेष राशि पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव: परेशानी

वृष राशि पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव: शुभ

मिथुन राशि पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव: मध्यम

कर्क राशि पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव: अतिनेष्ट (घातक)

सिंह राशि पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव: कष्ट साध्य

कन्या राशि पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव: शुभ

तुला राशि पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव: शुभ

वृश्चिक राशि पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव: मध्यम

धनु राशि पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव: आदि व्याधि

मकर राशि पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव: मध्यम

कुम्भ राशि पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव: शुभ

मीन राशि पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव: झंझट

चंद्र ग्रहण किसे कहते हैं

चंद्र ग्रहण उस खगोलीय स्थिति को कहते है जब चंद्रमा पृथ्वी के ठीक पीछे उसकी प्रच्छाया में आ जाता है। ऐसा तभी हो सकता है जब सूर्य, पृथ्वी और चन्द्रमा इस क्रम में लगभग एक सीधी रेखा में आते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस स्तिथि के कारण चंद्रग्रहण केवल पूर्णिमा को ही घटित हो सकता है।

चंद्र ग्रहण की अवधि

चंद्र ग्रहण का प्रकार और चंद्र ग्रहण की अवधि चंद्र आसंधियों के सापेक्ष चंद्रमा की स्थिति पर निर्भर करता है। किसी सूर्य ग्रहण के विपरीत, जो कि पृथ्वी के एक अपेक्षाकृत छोटे भाग से ही दीखता है, चंद्रग्रहण को पृथ्वी के रात्रि पक्ष के किसी भी भाग से देखा जा सकता है।

चंद्र ग्रहण की उज्ज्वलता पूर्ण चंद्र से भी कम

जहां चंद्रमा की छाया की लघुता के कारण सूर्यग्रहण किसी भी स्थान से केवल कुछ मिनटों तक ही दिखता है, वहीं चंद्र ग्रहण की अवधि कुछ घंटों की होती है। इसके अतिरिक्त चंद्रग्रहण को, सूर्य ग्रहण के विपरीत, आंखों के लिए बिना किसी विशेष सुरक्षा के देखा जा सकता है, क्योंकि चंद्र ग्रहण की उज्ज्वलता पूर्ण चंद्र से भी कम होती है।

चंद्र ग्रहण और विज्ञान केन्द्र

बीएम बिड़ला विज्ञान केन्द्र के निदेशक बी.जी सिद्धार्थ ने यहां कहा कि बुधवार को पड़ने वाला पूर्ण चंद्र ग्रहण भारत से दिखाई देगा जिसमें चंद्रमा लाल भूरा रंग लेगा जिसे ‘ब्लड मून’ भी कहा जाता है। इस घटना को ब्लू मून और सुपर मून का भी नाम दिया गया है।

चन्द्र ग्रहण कब होता है

इस अद्भुत घटना को विस्तृत रूप से बताते हुए सिद्धार्थ ने कहा कि चंद्र ग्रहण के दौरान पृथ्वी, सूर्य और चन्द्रमा के बीच में आ जाती है और पृथ्वी की छाया चांद पर पडती है। सिद्धार्थ ने कहा, ‘‘यदि तीनों लगभग एक ही रेखा पर आते है तो पूर्ण चंद्र ग्रहण है।

चंद्र ग्रहण कब है (ब्लड मून)

यहां तक कि पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान सूर्य की कुछ किरणें पृथ्वी के वायुमंडल के माध्यम से अपवर्तित होती है और चन्द्रमा हल्की भूरी लाल चमक ले लेता है और यही 31 जनवरी को घटित होगा। कुछ लोग इसे ‘‘ब्लड मून’ भी कहते है।

चंद्र ग्रहण के समय भूलकर भी न करें ये काम

ग्रहण के समय मूर्ति छूना, भोजन तथा नदी में स्नान करना वर्जित माना जाता है।

सूतक काल के समय किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत नहीं करनी चाहिए।

भोजन ग्रहण करने और पकाने से दूर रहना अच्छा माना जाता है।

देवी देवताओं और तुलसी आदि को स्पर्श नहीं करना चाहिए।

सूतक के दौरान गर्भवती स्त्री का घर से बाहर निकलना और ग्रहण देखना वर्जित माना जाता है।

ये शिशु की सेहत के लिए अच्छा नहीं माना जाता क्योंकि इससे उसके अंगों को नुकसान पहुंच सकता है।

इसके अलावा नाख़ून काटना, बात कटवाना, निद्रा मैथुन आदि जैसी गतिविधियों से भी ग्रहण व् सूतक काल के समय परहेज करना चाहिए।

माना जाता है इस काल में स्त्री प्रसंग से बचना चाहिए अन्यथा आंखों से संबंधित बिमारियों के होने का खतरा बना रहता है।

ग्रहण समाप्त होने के पश्चात् घर को गंगाजल से शुद्ध करना चाहिए और सूतक काल प्रारंभ होने से पूर्व दूध, जल, दही, अचार आदि खान-पान की सभी चीजों में कुशा या तुलसी के पत्ते दाल देने चाहिए।

माना जाता है ग्रहण के दौरान खान पान की सभी चीजें बेकार हो जाती है और वे खाने लायक नहीं रहती। ऐसा करने से आप ग्रहण समाप्त होने के बाद इन्हें पुनः खा सकते है।

 

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