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क्यों ? कैसे ? करें देहदान-अंगदान

 Body- Organ Donation- Towards  A Healthy Society -अरूण आनंद

एकांत में आत्मसाधना व लोकांत में सर्वस्वसमर्पणपूर्वक सृष्टि व जीव की सेवा-यह आदर्श जीवन की कल्पना भारतीय संस्कृति ने की है। मरणोपरांत देहदान के कार्य में ये दोनों कार्य तथा संस्कार संपन्न होते हैं।संघ प्रमुख मोहन भागवत जी के यह शब्द लेखक अरुण आनंद की पुस्तक Body- Organ Donation- Towards  A Healthy Society  में दिए गये उनके शुभकामना संदेश से हैं, जो देहदान और अंगदान के महत्व को प्रकाशित करने के लिए स्वयं में परिपूर्ण हैं।

आज देश में देहदान और अंगदान के विषय में समाज की जागरूकता बढ़ रही है। दधिचि देहदान समिति इस विषय में वर्षों से लोगो को जागरुक करने का कार्य कर रही है, लेकिन इसके बावजूद समाज में ऐसे अनेक प्रयासों की आवश्यकता है। देहदान और अंगदान का महत्व क्या है? समाज में इसकी क्या आवश्यकता है? ये कैसे और कहां किया जा सकता है? इन सभी और देहदान-अंगदान विषय में सामान्यजनों की सभी जिज्ञासाओं का समाधान BODY-ORGAN DONATION, Towards A Healthy Society पुस्तक में मिलता है।

दधिचि देहदान समिति और प्रभात प्रकाशन के संयुक्त प्रयास से प्रकाशित ये पुस्तक हर घर के लिए उपयोगी है। सहज भाषा में देहदान और अंगदान के बारे में जानकारी देती ये पुस्तक इस विषय में सभी की जिज्ञासाओं को शांत करती है और साथ ही प्रेरणा देती है कि अपने जीवन के साथ साथ आप देहदान और अंगदान करके अपनी मृत्यु को भी समाजोपयोगी बना सकते हैं।

पुस्तक के लेखक वरिष्ठ पत्रकार अरूण आनंद है। इसका प्रकाशन प्रभात प्रकाशन की ओर से किया गया है। भाषा अंग्रेजी है और मूल्य 300रुपये है।

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