You are here
Home > breaking > क्योंकि मैं नौकरी करता हूं- आदित्य भारद्वाज

क्योंकि मैं नौकरी करता हूं- आदित्य भारद्वाज

आज मीडिया बार—बार स्कूल की लापरवाही को लेकर बार—बार चैनल पर राग अलाप रहा है। अखबारों में लगातार लिखा जा रहा है। यह सब बस कुछ दिनों के लिए है। इसके बाद सबकुछ वैसा हो जाएगा, जैसा पहले था। आईएएस अधिकारी, बड़े संपादक और प्रभावशाली लोगों के बच्चे रेयान जैसे बड़े स्कूलों में पढ़ते हैं। मैंने स्कूल प्रिंसिपल के आगे बड़े—बड़े सुरमाओं को घिघयाते और मिमयाते देखा है। अपने लाडलों के दाखिले के लिए सिफारिशें लगाते देखा है।
अपने करियर के शुरुआती तौर में, मैं नोएडा में एजुकेशन बीट देखा करता था। मैं देश के सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले अखबार में रिपोर्टर था। शुरुआत में बड़ा मजा आता था। कुछ महीनों बाद मुझे अखबार के एक बड़े अधिकारी के परिचित के बेटे का एक नामी स्कूल में दाखिला कराने को कहा गया। बड़ी कोशिशों के बाद मैंने दाखिला करा दिया। उस स्कूल में प्रिंसिपल की अनियमितताओं के बारे में मेरे हाथ एक स्टोरी लगी। मैंने इस संबंध में आॅफिस आकर बता दिया। जानते हैं इसके बाद क्या हुआ। मेरी पेशी हुई, यहां तक की मुझे नौकरी से निकालने तक की बात हो गई। जैसे—तैसे नौकरी बची। मुझे साफ हिदायद दी गई है कि किसी भी प्राइवेट स्कूल के बारे में कुछ नहीं लिखना है जब तक कहा ना जाए।
ऐसा ही एक और वाकया है। नोएडा स्थित एक यूनिवर्सिटी में बीबीए के हेड आॅफ दा डिपार्टमेंट को मुझे हड़काने के लिए कहा गया, क्योंकि उसने अखबार के एक बड़े व्यक्ति की बात नहीं मानी थी। मैं गया और खूब सुनाकर आया। अगले दिन मुझे फिर से वहां भेजा गया, काम था कि मालिकों के परिवार के एक बच्चे कागज अटेस्ट कराने का क्योंकि उसे अगले दिन लंदन जाना था। वही हेड आॅफ दा डिपार्टमेंट जिसे मैंने आॅफिस के कहने पर हड़काया था। उसकी मुझे खुशामंद करनी पड़ी नहीं तो नौकरी चली जाती। खैर मैं वहां गया, उसने मुझे गार्ड बुलाकर बाहर करवा दिया। बावजूद इसके मैं छह घंटे तक वहां डटा रहा। किसी तरह उनको मनाया और कहा कि मेरी नौकरी का पार्ट है ये, कल जो मैंने आपको कहा था वो शब्द भी मेरे नहीं थे, और आज जो कह रहा हूं वह भी मेरे नहीं हैं। जो आॅफिस बोलता है करता हूं क्योंकि मैं नौकरी करता हूं।

Leave a Reply

Top