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हताश इनेलो कार्यकर्ताओं को चुनाव तक जोड़े रखने की कोशिश है बसपा से गठबंधन -जवाहर यादव

-जवाहर यादव
ना-ना करते करते भी इनेलो ने बसपा के साथ गठबंधन कर ही लिया। और कोई चारा भी नहीं था क्योंकि इस पार्टी का कार्यकर्ता पूरी तरह हतोत्साहित हो चुका है और इधर-उधर ठिकाने ढूंढ रहा है। इनेलो की कोशिश है कि किसी तरह चुनाव तक उनके कार्यकर्ता साथ बने रहे। उन्हें एक नई उम्मीद देने के लिए यह पैंतरा चला गया है। 2014 में भी कार्यकर्ताओं को बहकाने के लिए ओमप्रकाश चौटाला जी के जेल से शपथ लेने की बात कही गई थी लेकिन फायदा कुछ नहीं हुआ।
इनेलो का हाल भी कोंग्रेस जैसे हो गया नेताओ के अंदर जाने के बाद जो नेता लगातार कार्यकर्ताओं के बीच घूम रहा था वो कहते है की बंशीलाल जी विनाश पुरुष है तो दूसरे नेता कहते है विकास पुरुष है यह देख इनेलो का कार्यकर्ता काना फुंसी करता है ये तो वैसे ही हुआ जिस प्रकार राहुल गांधी ने कोंग्रेस सरकार में देश के प्रधानमंत्री मनमोहन जी का अध्यादेश फाड़ दिया था, वो बेचारा ठगा महसूस कर रहा है  दरअसल इस दल के पास ना नीति बची है ना नेता, बस लोगों को झूठी उम्मीद देकर बहकाने का ही तरीका बचा है।
बसपा के साथ इनेलो का गठबंधन पूरी तरह से बेतुका और अप्राकृतिक है क्योंकि दोनों दल अलग-अलग विचारधारा पर चलते हैं। यह दल दोनों दलों की सत्ता की भूख को दिखाता है। यह गठबंधन हरियाणा में पहले भी असफल हो चुका है । उत्तरप्रदेश में सूपड़ा साफ करवा चुकी मायावती जी हरियाणा में कहां से झंडे गाड़ देंगी। यह इनके कार्यकर्ताओं का दुर्भाग्य ही है कि उन्हें ऐसे दोगले और ड्रामेबाज नेताओं के पीछे-पीछे घूमना पड़ता है।

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