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नागरिकता संशोधन बिल के विरोध में असम बंद, पूरे पूर्वोत्तर में उबाल ।

अनीता चौधरी

लोकसभा में नागरिक संशोधन बिल पास होने के साथ ही असम सहित पूरा नार्थ-ईस्ट उबल रहा है । इस बिल के खिलाफ ये उबाल असम से लेकर बंगाल तक है । सोमवार को लोकसभा से बिल पास होने के बाद आल असम यूनियन की तरफ से असम बंद का आह्वान किया गया । कई अन्य संगठनों और राजनीतिक दलों ने भी इस बंद को अपना समर्थन दिया। इस बंद के आह्वान के मद्देनजर असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी ।
मंगलवार को इस बंद के दौरान आगजनी की कई खबरें भी सामने आई । पूर्वोत्तर की तरफ चलने वाली रेल सेवाएं भी इससे प्रभावित रहीं । मंगलवार को छात्र संगठन के विरोध के समर्थन में गुवाहाटी में बाजार पूरी तरह से बंद रहा । जबकि डिब्रूगढ़ और जोरहाट में प्रदर्शन के दौरान आगजनी भी हुई। खबर है कि स्टूडेंस का ये विरोध प्रदर्शन बुधवार को भी जारी रहेगा ।

लोकसभा में नागरिक संशोधन बिल पास होने के साथ ही असम सहित पूरा नार्थ-ईस्ट उबल रहा है । इस बिल के खिलाफ ये उबाल असम से लेकर बंगाल तक है । सोमवार को लोकसभा से बिल पास होने के बाद आल असम यूनियन की तरफ से असम बंद का आह्वान किया गया । कई अन्य संगठनों और राजनीतिक दलों ने भी इस बंद को अपना समर्थन दिया। इस बंद के आह्वान के मद्देनजर असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी ।
मंगलवार को इस बंद के दौरान आगजनी की कई खबरें भी सामने आई । पूर्वोत्तर की तरफ चलने वाली रेल सेवाएं भी इससे प्रभावित रहीं । मंगलवार को छात्र संगठन के विरोध के समर्थन में गुवाहाटी में बाजार पूरी तरह से बंद रहा । जबकि डिब्रूगढ़ और जोरहाट में प्रदर्शन के दौरान आगजनी भी हुई। खबर है कि स्टूडेंस का ये विरोध प्रदर्शन बुधवार को भी जारी रहेगा ।

नागरिकता संशोधन बिल के विरोध में बिगड़ते हालात को देखते हुए त्रिपुरा सरकार ने राज्य में 48 घंटे के लिए इंटरनेट और एसएमएस सेवापर प्रतिबंध लगा दिया है। क्षेत्रों में शुरू हुए विरोध के कारण असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा में सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत की गई।
दरअसल, नागरिकता संसोधन बिल को लेकर नार्थ ईस्ट राज्यों में रहने वाले लोगों को अपनी पहचान खोने का डर है। क्षेत्र के कई संगठनों ने अपने-अपने स्तर पर बिल का विरोध शुरू किया। हालांकि, नगालैंड इस विरोध में शामिल नहीं हुआ। इसका कारण वहां जारी हॉर्नबिल फेस्टिवल है। मणिपुर भी गृहमंत्री अमित शाह के इस ऐलान के बाद कि मणिपुर में इनर लाइन परमिट सेवा शुरू की जाएगी , इस बंद को अपना समर्थन नही दिया ।

हालांकि यह विधेयक अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड और मिजोरम में लागू नहीं होगा, जहां आईएलपी व्यवस्था है इसके साथ ही संविधान की छठी अनुसूची के तहत शासित होने वाले असम, मेघालय और त्रिपुरा के जनजातीय क्षेत्र भी इसके दायरे से बाहर होंगे ।
नागरिकता संशोधन बिल 2019 गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को भारत की नागरिकता का मौका प्रदान करता है। इसमें पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान में किसी तरह की धार्मिक बाध्यता का सामना करने वाले लोग आवेदन दे सकते हैं। भारत में पांच साल रहने के बाद उन लोगों को भारत की नागरिकता दे दी जाएगी। वर्तमान नियमों के अनुसार 11 साल बाद यह नागरिकता दी जा रही थी।

भारत के गृहमंत्री अमित शाह ने ये साफ कर दिया है कि इस बिल का भारत में रहने वाले मुसलमानों से कोई लेना देना नहीं है ।

सोमवार रात 12.04 बजे लोकसभा में हुई वोटिंग में बिल के पक्ष में 311 और विपक्ष में 80 वोट पड़े। बिल पर करीब 14 घंटे तक बहस हुई।विपक्षी दलों ने इस बिल को धर्म के आधार पर भेदभाव करने वाला बताया।गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब में कहा कि यह बिल यातनाओं से मुक्ति का दस्तावेज है। भारतीय मुस्लिमों का इससे कोई लेना-देना नहीं है। यह बिल केवल 3 देशों से प्रताड़ित होकर भारत आए अल्पसंख्यकों के लिए है। इन देशों में मुस्लिम अल्पसंख्यक नहीं हैं, क्योंकि वहां का राष्ट्रीय धर्म ही इस्लाम है। लेकिन कांग्रेस समेत 11 विपक्षी दलों ने बिल को मुस्लिम विरोधी और धार्मिक आधार पर भेदभाव करने वाला बताया है। एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने तो इस बिल की कॉपी को सदन में फाड़ते हुए इसे भारतीय संविधान पर प्रहार बताया और जिन्ना युग के शुरुआत का दस्तावेज करार दिया ।

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