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जन्म से कोई ब्राह्मण नही होता है अपने कर्मों से होता है- स्वामी रामदेव

राम देव ने अपने भाषणों में आर्य समाज और स्वामी दयानंद सरस्वती के आदर्शों पर चलने के लिए संकल्प बद्ध होने को कहा। स्वामी रामदेव ने कहा कि त्रृषि दयानंद हम सबके पुरी राष्ट्र के आदर्श हैं । उन्होने कहा कि मुझे गर्व हा कि मेरी शिक्षा गुरूकुल में हुई और मै एक संयासी हुं। उन्होने कहा कि पुरे देश को सारे आर्य समाज यह संकल्प ले कि वेदों की , देवों की , त्रृषि मुनियों की प्रतिष्ठा पुरें विश्व में हो । और यह समझ लें कि मनुष्य का जीवन परमार्थ के हित के लिए प्राप्त हुई है। उन्होने कहा कि देश का हर परिवार संकल्पित हो कि दयानंद के संस्कार हमारे परिवार के हर व्यक्ति को मिले ऐसा परंपरा हो परिवार में । महर्षि दयानंद का मानते थे कि भगवान और भक्त के बीच दुरी श्रद्धा की है तो भगवान को पाना दयानंद के आदर्शों को आगे बढाना है तो श्रद्धा कायम रखनी होगी क्योकि महर्षि दयानंद के भाती भगवान का महिमा मंडित करने वाला दुनिया मे कोई दुसरा व्यक्ति नही हुआ है ।

देश और समाज कल्याण के हित में जितने भी आंदोलन हुए चाहे शिक्षा , वैदिक शिक्षा, समाज में समानता के पर्चार का , यहां तक कि भारत के संविधान की आत्मा मौलिक अधिकारो की बात स्वामी दयानंद की ही देन है…उन्होने कहा कि दयानंद के आदर्शों को मानता हुं और मै भी ये मानता हु कि जन्म से कोई ब्राह्मण नही होता है अपने कर्मों से होता है.. आर्य समाज के प्रचार प्रसार के लिए आर्य समाज को एजेडा बनाना होगा कुछ प्रमाणिक यज्ञ करना होगा, वेद दर्शनो का प्रचार पुरी दुनिया मे होना चाहिए और इसी कड़ी में सत्यार्थ प्रकाश को सभी भाषाओं में लिखने का एजेंडा एक बड़ी कोशिश है जिससे देश और समाज से पाखंडीयों और पाखंड़ को परास्त किया जा सके.। आर्य समाज क्रांति को और आगे बढाने के लिए अगले आर्य महासम्मेलन तक 500 बनाने की बात की .। उन्होने कहा कि दयानंद सरस्वती के आदर्शों को मानते हुए पतंजली संस्था में सभी जाती के लोगो को वेदो का ज्ञान दिया जाता है चाहे वो महिला हो या पुरूष सामान्य वर्ग का हो या निम्न सबको वेद पढाया जाता है ।

दयानंद के आदर्शों को आगे बढाने के लिए सिर्फ बखान करना काफि नही है जरूरी है कि आर्यसमाज और संस्था से जुड़े हर व्यक्ति का व्यक्तित्व में स्वामी दययानंद का चरित्र दर्शन हो..तभी आर्य समाज क्रांति पुरि दुनिया में हर जन-जन तक फेलेगी। मनुष्य के चरित्र निर्माण में दयानंद सरस्वती का बहुत बड़ा योगदान है तो संकलपित होकर स्वामी दयानंद को अपना अराध्य गुरू मानकर उनके सपने को आगे बढाया जाए और अगले 5 वर्षों में एक हजार आर्य संयासी तैयार हो और महर्षि दयानंद के विचारो और आदर्शों को जन-जन तक फैलाए और मनुष्यता के मायनों को समझे और एक दुसरे से प्रेम भाव से मिले सुख-दुख को समझे और जाति-पाति , छुआ-छुत , ऊंच-नीच भेद -भाव , अंधविश्वास जैसी कुरितियों का विरोध करे और समाज से उन्हे जड़ से उखाड़ फेंके और महर्षि दयानंद के देश को विश्व गुरू बनाने के सपने को पुरा करें । स्वामी रामदेव ने अपने भाषण का अंत स्वामी दयानंद के स्मरण में भजन प्रस्तुत कर किया।


इस आर्य महासम्मेलन के दुसरे दिन मुख्य अतिथि योगगुरू स्वामी रामदेव के साथ केंद्रिय मंत्री नीतिन गड़करी , सुधांसु त्रिवेदी ( बीजेपी , जेनरल सेकरेटरी) श्री देवव्रत आचार्य (राज्यपाल , हिमाचल प्रदेश), श्री जगदीश मुखी (राज्यपाल , असम) , श्री गंगा प्रसाद (राज्यपाल , सिक्किम), सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के सुपेश चंद आर्ये, विनय आर्य, आदि उपस्थित सभी मंत्री ने सम्मेलन के दुसरे दिन सभा को संबोधित किया ।

दिल्ली के रोहिणी में स्थित जापानी पार्क में आयोजित इस अंतर्राष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन में भारत के अलावा दुनिया के 32 देशों से आए आर्य समाज के प्रतिनिधि भी शामिल रहे । चार दिनो तक चलने वाले इस अंतर्राष्ट्रीय आर्य महा सम्मेलन का समापन 28 अक्टूबर को केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह जी के कर कमलो से होगा।

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