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11 दिन में बनी ‘आकाशी पुलोवर’

कोलकाता 7 मार्च। टॉलीवुड अभिनेता समदर्शी का मानना है कि भगवान को भी यह मालूम नहीं होगा कि प्रत्येक शुक्रवार को कौनसी फिल्म चलनी वाली है। और कौनसी नही? समदर्शी ने कहा, आजकल टॉलीवुड फिल्में ही नही बल्कि बॉलीवुड फिल्में भी नही चलती हैं। और ऐसे महत्वपूर्ण समय में हम सिर्फ और सिर्फ बांग्ला फिल्मों को बचाने का प्रयास कर रहे है। जी हां, हाल ही मे ऑरफीयूस मुखोटी निर्देशित बांग्ला फिल्म ‘आकाशी पुलोवर’ के लिए आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान समदर्शी ने कुछ ऐसी ही बातें कहीं।

आपको बताऐं की 88 मिनट की अवधि वाली इस फिल्म को कान फिल्म फैस्टीवेल के लिए भेजा जा चुका हैं। और इस साल के अंत तक ये फिल्म भारत में रिलीज की जाएगी। फिल्म को महज 11 दिनो मे शूट किया गया है। फिल्म की कहानी एक बूढ़ी औरत शुभा मित्रा (आलोकनंदा रॉय) पर केंद्रित है। जिसको स्वेटर बुनने का बेहद शौक है। वह अपने पति के साथ भी नहीं रहती है। यहां तक कि वह अपने करीब किसी को आने भी नहीं देती है। लेकिन अचानक उनकी जिंदगी में किसी का आगमन होता है और वह बदलने लगती हैं। पूरी फिल्म की कहानी इसी के इर्द-गिर्द घूमति है।

इस फिल्म मे समदर्शी के अलावा आलोकनंदा रॉय, छन्दा चटर्जी, रुपा भटाचार्य मुख्य भूमिका में है। फिल्म मे म्यूजिक जय शंकर दे रहे हैं। फिल्म के निर्माता नवीन अग्रवाल और नीरज आरसी गोहिल हैं।

मौके पर उपस्थित अभिनेत्री रुपा ने बताया मुझे हर फिल्मों में एक इंटेलेक्चुअल शहरी औरत के किरदार मे दिखाया गया है। लेकिन इस फिल्म मे मैं एक अनपढ़ महिला के चरित्र में हूं। जो इस फिल्म का मुख्य किरदार से जुड़ा हुआ है। उन्होंने आगे कहां, इस फिल्म के जरिये दो नारी चरित्र के बीच विषमता को दिखाया गया है। मेरे ख्याल से हर गृहस्थ महिलाएं इस फिल्म मे मेरे चरित्र से अपनेआप को जोड़ पाएंगे।

वही मौके पर उपस्थित फिल्म के नायक समदर्शी ने ये पूछे जाने पर कि इस फिल्म का चयन उन्होंने क्यों किया, के जवाब में कहा, फिल्म की स्क्रिप्ट मुझे अच्छी लगी। यह एक एक्सपेरिमेंटल फिल्म है जो मेरे लिए सबसे खास विषय था।

आपको बतादे कि समदर्शी की आने वाली बांगला फिल्मों मे क ख ग घ और गोभीर गोपोन बृष्टि खास है।

हर निर्देशक की चाहत होती है की वह एक बेहतर फिल्म बनाये। उसकी तमन्ना तब पूरी होती है जब उसको कोई उपयुक्त निर्माता मिल जाये। और इत्तेफाक से मेरे साथ कुछ ऐसा ही हुआ। मुझे नीरज जी मिल गये। जी हां, फिल्म कैसी बनी है, पुछने पर मौके पर उपस्थित फिल्म के निर्देशक ऑरफीयूस मुखोटी ने उपरोक्त बाते कहीं। उन्होने आगे कहा, नीरज जी जैसे लोग अगर मिल जाये तो जिंदगी धनिया पत्ती बन जाती है।

फिल्म से जुड़े खास लम्हों के बारे मे ब्यान करते हुए ऑरफीयूस ने कहा, फिल्म के लिए 10 दिनो से हम सभी प्री प्रोडक्शन के लिए लगे हुऐ थे। कार्यक्रम के दौरान फिल्म के निर्माता नीरज, नवीन जय सहित कई लोग मौजूद थे।

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