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‘आडवाणी के साथ 32 साल’, पुस्तक पर हुयी विचार गोष्ठी

बोल बिंदास,नई दिल्ली: विश्व पुस्तक मेला में विश्वम्भर श्रीवास्तव द्वारा रचित किताब ‘आडवाणी के साथ 32 साल’ पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया.. जिसमे प्रमुक वक्तागण श्री राम बहादुर राय (अध्यक्ष इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र), डॉ. बलदेवभाई शर्मा (अध्यक्ष राष्ट्रीय पुस्तक न्यास), डॉ रामशरण गौड़ ( अध्यक्ष दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी), डॉ दयाप्रकाश सिन्हा (पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संस्कार भारती) शामिल हुए

वक्ताओं ने पुस्तक की अलग घटनाओं का जिक्र करते हुए अपने अनुभव साझा किए

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला के केंद्र अध्यक्ष रामबहादुर राय ने पुस्तक का जिक्र करते हुए कहा कि वाराणसी में जन्मे विश्वम्भर जी आडवाणी के साथ अपनी जिंदगी में आये उतार चढ़ाव का जिक्र किया है साथ ही 1973 का जिक्र करते हुए कहा उस समय आडवाणी जी के साथ विश्वम्भर जी का जुड़ना आडवाणी और जनसंघ के लिए बहुत महत्वपूर्ण था.. इमरजेंसी का जिक्र करते हुए कहा कि जब आडवाणी जी जेल में थे तो विश्वम्भर जी भूमिगत होकर आडवाणी जी के उद्देश्यों को पूरा किया

पुस्तक के बारे में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष बलदेवभाई शर्मा ने कहा कि आडवाणी के साथ 32 साल तक कि निकटता बड़ी उपलब्धि है.. विश्वम्भर जी ने इस निकटता को कभी अपने लाभ के लिए नही भुनाया जो आज के दौर में ऐसा कम पाया जाता है.. जो इस किताब को पढ़ने में मिलती है

किताब के लेखक और आडवाणी जी के पूर्व निजी सहायक  विश्वम्भर श्रीवास्तव ने कहा आडवाणी जी के साथ बहुत उतार चढ़ाव देखे और इस दौरान कभी भी धन और यश के पीछे नहीं भागा.. जो भी पीड़ित आडवाणी जी के पास मिलने आया और नही मिल पाया उसकी समस्या सुनकर हर संभव मदद की और इसके लिए कई बार आडवाणी जी से लड़कर भी पीड़ित के लिए समय उनका निकलवाया उसका भी जिक्र किताब में किया है
वहीं संस्कार भारती के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दयाशंकर सिन्हा ने विश्वम्भर जी को आडवाणी जी का हनुमान बताया और कहा जनसघ को पुराने दौर का जानना हो तो किताब में इसका जिक्र मिलता है

कार्यक्रम में दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी के अध्यक्ष रामशंकर गौड़ ने कहा कि मानवता का मूल्य क्या होता है वो किताब में बखूबी मिलती है

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