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हम केरल की भूमि में लोकतंत्र को दफनाने नहीं देंगे: एबीवीपी

एबीवीपी महारैली पूरे भारत के लगभग 50000 कार्यकर्ताओं के साथ केरल में संपन्न हुआ। चलो केरला अंततः तिरुवनंतपुरम की पवित्र भूमि में उत्साह के साथ संपन्न हुआ। वर्तमान सरकार से अलग विचारधारा एवं एक लोकतांत्रिक दृष्टिकोण रखने वाले शहीदों के बलिदान को याद करते हुए पूरा शहर भगवामय हो गया |
एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने लाल आतंकवाद से राज्य से बचाने के लिए कश्मीर से केरला तक की यात्रा की है। जिस तरह से वर्तमान सरकार सीपीआई (एम), निर्दोष लोगों की मौत की उपेक्षा कर रही है और सभी मामलों में अलग-अलग विचारधारा वाले छात्रों पर लगातार हमले सीधे सीपीआई (एम) सरकार की भागीदारी को दर्शाती है|
महारैली को संबोधित करते हुए, राष्ट्रीय महामंत्री श्री विनय बिदरे जी ने सबसे पहले रैली में सभी प्रतिनिधियों का स्वागत किया और ‘अभिमानम, अभिमानम, अभिमानम केरलम’ “अपमानम अपमानम अपमानम वामपंथ” के नारे से अपना संबोधन शुरू किया और कहा कि केरला सांस्कृतिक विरासत तथा आदिशंकराचार्य की पवित्र स्थान है, यह अपनी प्राकृतिक सुंदरता और साक्षरता दर के लिए प्रसिद्ध राज्य है, लेकिन कम्युनिस्ट हर चीज को नष्ट करने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करते हैं। 1957  में जब सीपीआईएम सत्ता में आया, तो निर्दोष लोगों के लिए सबसे खराब दौर शुरू हो गया । जबसे पिनराई विजयन केरल के मुख्यमंत्री बने, 14 से अधिक निर्दोष लोग अपनों से जुदा हो गए और 300 से अधिक लोगों के ऊपर हमला किया गया| चरमपंथवाद कम्युनिस्टों की शक्ति है और केरला में सीपीआईएम सरकार उसी का अनुसरण कर रही है। हम पूरे देश के सामने कम्युनिस्टों का वास्तविक चेहरा रखने के लिए केरल के देश में आए हैं, तथा हमारे शहीदों को सलाम करने एवं शहीदों के परिवारों का समर्थन करने और कम्युनिस्टों के दोहरे चरित्र को प्रकट करने के लिए तथा केरल में हजारों निर्दोष लोगों पर कम्युनिस्टों द्वारा किए गए क्रूरता का पर्दाफाश करने के लिए हम इस धरती पर आये हैं | जेएनयू में वे अपनी शक्ति के रूप में एक कलम का दावा करते हैं, लेकिन यहां वे तलवार को अपनी ताकत के रूप में इस्तेमाल करते हैं। केरल के वर्तमान स्थिति में स्पष्ट रूप से पता चलता है कि सीपीआईएम महिला विरोधी, दलित विरोधी, शिक्षा विरोधी, लोकतंत्र विरोधी और भारत विरोधी है।
एबीवीपी के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री सुनील अम्बेकर जी ने महारैली को संबोधित करते हुआ बताया कि 17 सितंबर, 1996 को 21 साल पहले सीपीआईएम ने युवा छात्रों सुजीत, अनू और किम को मार डाला, लेकिन उनके बलिदानों से प्रेरित होने के बाद केरल में हजारों छात्रो ने कम्युनिज्म को केरला से बाहर निकालने का प्रतिज्ञा ली। दिल्ली में कम्युनिस्टों का दावा है कि वे गरीब लोगों के अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं लेकिन वास्तविकता में केरल, छत्तीसगढ़, झारखंड और पश्चिम बंगाल में बहुत से लोग मारे गए हैं। वामपंथी सत्ता में बने रहने के लिए आम व्यक्ति के मन में आतंक पैदा करना चाहते हैं साम्यवाद, माओवाद और आतंकवाद समान हैं। आज मैं इस मंच के माध्यम से वामपंथियों को बताना चाहता हूँ केरल की इस भूमि पर सत्ता बलपूर्वक नहीं प्राप्त किया जा सकता क्यूकि यह बलिदान की भूमि है।
किशोर बर्मन, पश्चिम बंगाल के संगठन मंत्री ने वहां मौजूद कम्युनिस्टों की दोहरी प्रकृति का खुलासा किया और आम लोगों के जीवन में फैल रहे आतंकवाद का पर्दाफाश किया। एबीवीपी ने कहा कि केरल में हमारे कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए बलिदान केवल विचारधारा या संगठन के लिए नहीं थे बल्कि यह भारत की विचारधारा के लिए है।
आशीष चौहान, राष्ट्रीय संयोजक, थिंक इंडिया एबीवीपी ने कहा कि दूसरे के विचारों को दबाना किसी भी तरह का लोकतंत्र नहीं है। एबीवीपी हमेशा सभी पहलुओं पर बहस और चर्चा करने के लिए तैयार रहता है
निधिेश ओ ‘नरेन्द्रन, राष्ट्रीय मंत्री एबीवीपी ने बताया कि केरला में कम्युनिस्ट गुंडों ने क्रूरता पैदा कर दी है सभी प्रतिनिधियों को केरला में साम्यवाद के वास्तविक चेहरे को समझना होगा |
श्यामराज, प्रदेश मंत्री केरल, ने 1969 के बाद से कार्यकर्ताओं और निर्दोष लोगों के केरल में संघर्ष के बारे में विशाल जनमानस को अवगत कराया।
डीयू छात्रसंघ की महासचिव महामेधा नागर ने कहा।
जे एन यू में बलात्कार, बस्तर और पश्चिम बंगाल में महिलाओं की हालत तथा केरला में महिलाओं पर कम्युनिस्टों द्वारा किए गए हमलों ने उनकी विचारधारा को दर्शाया है जो कैम्पसों में नारीवाद की बात करता है।
जेएनयू के छात्रसंघ के अध्यक्ष पद की उम्मीदवार निधि त्रिपाठी ने कहा कि इन वामपंथी गुंडों का दोहरा चरित्र अब सभी के बीच सामने आया है। हम उनके भाषण और अभिव्यक्ति की तथाकथित स्वतंत्रता से काफी परिचित हैं, लेकिन वास्तव में वे किसका अनुसरण करते हैं यह हम सभी जानते हैं|
आज के कार्यक्रम में पहुंचे 1994 के पीड़ित सदानंद मास्टर ने सीपीआईएम को क्रूर बताया है जिनके दोनों पैर काट दिए गए थे  और उन्होंने कहा कि सीपीआईएम कुछ और नहीं बल्कि एक आतंकी संगठन है| उन्होंने बताया कि मैं इन वामपंथियों का शिकार नही हुआ हूं बल्कि मैं इनके खिलाफ लड़ रहा हूँ और उनके खिलाफ लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक ये ख़त्म नही हो जाते।
सानोप कुमार जो कि केरल में वामपंथियों के शिकार हुए है उन्होंने  छात्रों को संबोधित किया और कम्युनिस्टों द्वारा की गई क्रूरता को साझा किया तथा  जो संघर्ष उन्होंने झेला है उससे सभी को अवगत कराया ।
एबीवीपी के सभी राष्ट्रीय मंत्री और प्रदेश मंत्री भी उत्साही उपस्थिति के साथ मंच पर उपस्थित थे।
रैली के समापन के बाद, राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ नागेश ठाकुर जी ने कहा कि हमें केरल को हिंसामुक्त राज्य बनाने की आवश्यकता है और डॉ राकेश जी ने देश के कोने कोने से इस महारैली का हिस्सा बनने आये सभी प्रतिनिधियों को “वामपंथ और हिंसा मुक्त केरल” के प्रति शपथ दिलाया। इस महारैली ने संदेश दिया कि सम्पूर्ण देश केरल के लोकतांत्रिक दृष्टिकोण के साथ खड़ा है|

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