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सर अब बस भी करो- अतुल गंगवार

बोल बिंदास

बहुत हुआ सरजी अब बस भी करो. ये निंंदा, कड़ी निंदा, करारा जवाब देंगे, वो 1 काटेंगे तो हम 10 काटेंगे… ऐसे तमाम जुमले अब बस…बहुत हो गया, अब ये सब बंद करो.ये वक्त है कुछ करने का, कुछ कर दिखाने का. कौन सा तुमने लड़ने जाना है, जो डर रहे हो. तुमने तो बस सर हिलाना है बाकी का काम हमारे जांबाज सिपाही खुद कर लेंगे. मत लो तुम उनके सब्र का इम्तिहान खोलो उनके बंधे हाथ और फिर तमाशा देखो.

इस देश की जनता ने तुम्हे सिंर्फ रोटी कपड़ा और मकान के लिए ही नही चुना था. उसने तुममे अपना गौरव, अपना सम्मान भी देखा था. उस गौरव और सम्मान की रक्षा को तुम अपना सर हिलाओं, खोल दो हाथ मेरे रखवालों के फिर गिनते रहना कितने सर वो काट के लाये.

जिसे देश से प्यार नही क्यों उनको पालते हो. देशद्रोहियों को अवसर देकर क्यों हम सबको चिढ़ाते हो. कश्मीर में लोग सेना पर पत्थर फेंके, उनको थप्पड़ मारे उसमें कौन सी राजनीति तुम करना चाहते हो. जैसा लोग वैसा कानून बनाओं. सेना का आत्मसम्मान वापिस लाओ. अपनी कूटनीति की बातें अब हमें ना समझाओ जिसको जो भाषा समझ में आती है उसको उसी भाषा में समझाओं. जिसको इस देश में विश्वास नही खोल दो उसके लिए सारे दरवाज़े, जहां उसे सुकून मिले, आराम मिले, वही जाये वो अपना घर बसाये. ऐसे लोगों के चक्कर में हम अपना घर क्यों खराब करे? अपनी सुख शांति क्यूं बर्बाद करें. कानून का डंडा कस कर चलाओ.

बहुत हुआ सरजी बस करो, बंद करो ये बातें…अब कुछ करके दिखाओ.

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