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25 दिन बाद घर से मिला शव, एक लाचार मां के मौत की दर्द भरी दास्तां

करियर और पैसे कमाने की चाहत में इंसानी रिश्ते दिन पर दिन तार-तार हो रहे हैं। आए दिन इस तरह के मामले सामने आते हैं कि घर में बुजुर्ग माता या पिता की मौत हो गई और बाहर नौकरी कर रहे उनके बच्चों को पता ही नहीं चला। ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला दिल्ली से सटे नोएडा में सामने आया है। पुलिस ने पड़ोसियों की सूचना पर एक पॉश सोसायटी के फ्लैट से महिला का 25 दिन पुराना शव बरामद किया है।

शव सेक्टर 99 स्थित एक पॉश अपार्टमेंट के फ्लैट से बरामद किया गया है। बताया जा रहा है कि 52 वर्षीय महिला यहां अकेले रहती थीं। उन्हें किड़नी की बीमारी थी। उनका डायलिसिस भी चल रहा था। 19 सितंबर को उन्होंने बैंगलुरू में रह रहे अपने सॉफ्टवेयर इंजीनियर बेटे को फोन किया था।

फ्लैट से बदबू आने पर पड़ोसियों ने पुलिस को दी सूचना
उन्होंने बेटे को अपनी खराब तबियत के बारे में बताते हुए देखभाल के लिये बुलाया था, लेकिन काम की व्यस्तता की वजह से वह अब तक नहीं आ सका। फ्लैट में अकेली रह रही महिला ने अकेलेपन और देखभाल न होने की वजह से करीब 25 दिन पहले दम तोड़ दिया। फ्लैट से तेज बदबू आने पर पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी। सूचना पाकर मौके पर पहुंची थाना सेक्टर 39 पुलिस ने फ्लैट का दरवाजा तोड़ा तो उनके भी होश उड़ गए।

फ्लैट खुलते ही पूरी सोसायटी में फैल गई शव की बदबू
फ्लैट के अंदर महिला का सड़ी-गली हालत में शव पड़ा हुआ था। फ्लैट खुलते ही शव की बदबू पूरी सोसायटी में दूर-दूर तक फैल गई। दूर-दूर तक सोसायटी में रह रहे लोगों के लिए घंटों सांस लेना दूभर हो गया था। तेज बदबू के कारण फ्लैट से शव निकालने के लिए पुलिस को भी कुछ देर तक इंतजार करना पड़ा। फिलहाल शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

बीमारी की वजह से पति से हुआ था तलाक
जानकारी के मुताबिक महिला मूलरूप से पश्चिम बंगाल की रहने वाली थी। उनका तीन साल पहले पति से तलाक हो गया था। बताया जा रहा है कि इसी बीमारी की वजह से पति से उनका तलाक हो गया था। इसके बाद उनके पति पश्चिम बंगाल में रहने चले गए थे। पति के तलाक देने और बेटे के बैंगलुरू में नौकरी करने की वजह से वह नोएडा के सेक्टर-99 स्थित अपने फ्लैट में अकेली रह रहीं थीं।

समय पर नहीं करा पाती थीं डायलिसिस
इनका एक बेटा है, जो सॉफ्टवेयर इंजीनियर है और बैंगलुरु में नौकरी करता है। बताया जा रहा है कि महिला को किडनी की समस्या थी। इसके चलते वह कई साल से परेशान थीं। उनका हर सप्ताह डायलिसिस होता था। इसमें उनका खून बदला जाता था। इतनी बीमार होने के बावजूद उन्हें अस्पताल तक ले जाने वाला कोई नहीं था। इसलिये कई बार डायलिसिस समय पर नहीं हो पाती थी।

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