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टॉम ऑल्टर के साथ 17 साल- अतुल गंगवार

 

पेशे से पत्रकार अतुल गंगवार फिल्म लेखन और निर्माता के तौर पर कार्य करते हैं। अभिनेता टॉम ऑल्टर के साथ अपने 17 साल के सफर को कुछ इस तरह से याद किया है।

टॉम ऑल्टर जी से पहली मुलाकात एक इत्तेफाक थी। उस इत्तेफाक ने हमारा जो रिश्ता बनाया वो उनके ना रहने तक कायम रहा। आज ज़िन्दगी की रील को जब रिवाइंड करता हूं तो ऐसा लगता है जैसे कल की ही बात है। हम लोग यूटीएन चैनल के लिए एक सीरियल बना रहे थे, अदबी कॉकटेल। जिसे लिखा था निदा फाज़ली जी ने। एंकर की तलाश जारी थी किसी नाम पर चैनल सहमत नही होता था तो कोई हमारे बजट से बाहर होता था। एक सुबह ज़ी टीवी पर उनका मॉर्निंग शो देख रहा था, रोशन अब्बास के साथ एक गोरा आदमी बैठा बातचीत कर रहा था। बीच बीच में उर्दू के शेर यूं पढ़ रहा था जैसे कोई शायर। मुझे लगा कि हमारी तलाश पूरी हो गयी। मैने तुरंत नाज़िम भाई को फोन किया और कहा कि वो तुरंत ज़ी टीवी देखें। उन्होंने भी शो देखा और हमने फैसला किया कि मुंबई चला जाये, टॉम से मिला जाये । तो उस समय टीवी पर हुयी इतेफाकन मुलाकात हमारे मिलने की वजह बन गयी। मुंबई गए, टॉम को ढूंड़ना मेहनत का काम था। टॉम मोबाइल फोन नही रखते थे। मोबाइल उन्होंने ताउम्र नही रखा। किसी तरह खोज खाज के टॉम से मिले उन्हे अदबी कॉकटेल का कॉंसेप्ट बताया। उन्हें जैसे ही बताया कि निदा फाज़ली साहब इस शो के राइटर हैं तो वो बहुत खुश हुए। बात पैसों की आयी तो वो बोले आपके बजट में जो हो वो दे दीजिएगा, मेरे लिए निदा साहब के साथ काम करना ही बड़े फख्र की बात है। तो इस तरह अदबी कॉकटेल में टॉम ऑल्टर जी आये। अदबी कॉकटेल में उन्होंने नौशाद साहब, जॉनी वाकर, टुनटुन, बशीर बद्र, राकेश बेदी, लिलिपुट, अदनान सामी, पीनाज मसानी, जोगिन्दर, हसन कमाल, जगदीप, नक्श लायलपुरी, ग़ूफी पेंटल जैसी अनेक शख्सियतों का इंटरव्यू किया था। उस शो की सफलता में टॉम ऑल्टर का बहुत बड़ा हाथ था। मुझे याद है पहले शेडयूल में हम लेट चल रहे थे, हमें रात को स्टूडियो भी खाली करना था, टॉम सर ने 250 से अधिक एंकर लिंक्स और 5 लोगों के इंटरव्यू लगातार किये थे। इस बात को वो अक्सर कहते भी थे।

फिर एक लंबा अंतराल हमारे बीच में आया। वो अपने काम में व्यस्त हो गए और हम अपने। लेकिन गाहे बगाहे उनसे ई-मेल पर मुलाकात हो जाती थी। फिर उनसे मुलाकात हुयी सहारा टीवी के शो ‘चुनावी चाय’ में। टॉम उस शो को एंकर करने वाले थे और मैं भी एक बदली भूमिका में इस बार उनके साथ था। उनके सहयोगी एंकर चाय वाले के रुप में, जिसे वो प्यार से मोटू कह कर बुलाते थे। मेरे लिए फख्र की बात थी कि मैं पद्मश्री टॉम ऑल्टर के साथ टीवी स्क्रीन शेयर कर रहा था। उनके साथ काम करके लगा ही नही कि हम इतने बड़े कलाकार के साथ काम कर रहें हैं। पूरी टीम के साथ जिस तरह से उन्होंने काम किया कि सारे उनके मुरीद हो गए। एक प्यारा सा रिश्ता बन गया उनके साथ। दिल्ली,जयपुर,बनारस,पटना, रांची, हैदराबाद, बैंगलोर, मुंबई, अहमदाबाद, भोपाल हमारी चाय की दुकान मस्त चली। हालांकि टॉम सर मोदी जी से सहमत नही थे लेकिन स्क्रीन पर वो ये ज़ाहिर नही होने देते थे। यही तो टॉम आल्टर साहब की खासियत थी।

मैने हमने अपने पुराने कॉसेप्ट अदबी कॉकटेल पर काम करना शुरू किया। इस बार हमने इसे टीवी की दुनिया से बाहर निकाल कर लाइव करने की योजना बनाई। अदबी कॉकटेल यानि साहित्य, कला और संगीत की कॉकटेल। स्वाभाविक था कि मैने पहले निदा फाज़ली साहब से इसके लिए बात की, उनकी सहमति मिलते ही, मेरी बात हुयी टॉम सर से। हमेशा की तरह उन्होंने कॉसेप्ट सुना और बोले हां मैं तैय्यार हूं। मैने कहा इस बार ये मैं खुद प्रोडयूस कर रहा हूं, मेरे पास पैसे नही हैं। वो बोले पैसे दो या ना दो, मुझे समोसा खिला देना, मैं काम करने के लिए तैय्यार हूं। बस फिर क्या था अदबी कॉकटेल की पहली अल्बम ‘सुनो तुम’ की शुरूआत हो गयी। ‘सुनो तुम’ में युवा गायक-संगीतकार जैज़िम शर्मा के साथ टॉम सर सहजता के साथ काम किया। कभी उसे ये अहसास नही होने दिया कि वो नया है।

अदबी कॉकटेल की पहली प्रस्तुति ‘सुनो तुम’ यादगार बन गयी । गीता दास जी की निदा साहब की शायरी पर बनाई पेंटिंग्स, टॉम सर, जैज़िम, पारूल और मालती जोशी फाज़ली की आवाज़ ने निदा साहब की शायरी को जीवंत बना दिया। दुर्भाग्य से निदा साहब का देहांत हो गया। ‘सुनो तुम’  सामने लॉच नही हो पायी। निदा साहब के लिए टॉम सर के मन में बहुत श्रृद्धा थी। जब हम लोगों ने उनकी याद में एक शो रखने का फैसला किया तो उन्होंने आग्रह किया कि वो इसमें ज़रुर पार्टिसिपेट करेंगे। वो आये और उनकी वजह से ये शो यादगार बन गया। इसी साल ये ‘सुनो तुम’ का डिजीटल लॉच किया गया।  एक बार फिर टॉम सर ने अपनी उपस्थिति से उसे यादगार बना दिया।

आपसे जुड़ी बाते, यादें कुछ पन्नों में समेटना मुश्किल ही नही नामुमकिन है। आप की रूह सुकून से रहे। ईश्वर से कामना करता हूं।

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