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अगले जनम मोहे लेबर बनईयो-अतुल गंगवार

बोल बिंदास-

हे ऊपर वाले तुझसे हाथ जोड़कर प्रार्थना है कि अगले जनम में मुझे लेबर बनईयो. इस जनम में तूने मुझे पत्रकार बनाया, क्यूं बेकार बनाया? दुनिया के हक को लड़ने वाला, सत्ता के तख्त को पलटने वाला, क्रांति का जनक बनाया, तुझे क्या हक था कि मुझे इतनी गलतफहमियां दी कि मैं खुद को खुदा समझने लगा. मुझे लगा कि मेरे हाथ में वो ताकत है कि मैं जो चाहे कर सकता हूं. जब चाहूं निजाम बदल सकता हूं. कानून मेरी कलम, कैमरे की ताकत से डरता है, नेता मेरे आगे पीछे घूमता है, बड़े बड़े लोग मेरे आगे पीछे छपने, दिखने के लिए डोलते हैं. बस चारो तरफ मैं ही मैं हूं. हे भगवन तू मुझे सबकुछ देता पर ये गलतफहमी तो ना देता.

ये जो पत्रकार नाम का जीव तूने बनाया है. बहुत खूब बनाया है. जब तक व्यवस्था के साथ होता है खूब फलता फूलता है. समाज में खूब क्रांति लाता है लेकिन जब खुद पर पड़ती है, तो अपने को अकेला पाता है. घर परिवार को चलाने के लिए नाना प्रकार के प्रपंच रचने पड़ते हैं. व्यवस्था के खिलाफ खड़े हो जाओ तो नौकरी से हाथ भी धोना पड़ सकता है. मालिक के इशारों पर कठपुतली की तरह नाचों तो जीवन सफल. कहीं विरोध दिखाया तो बस…सड़क की लंबाई नापते जीवन बीत जाता है.

सबके हक के लिए लड़ा पर जब खुद पर पड़ी तो समझ में आया कि पत्रकार वो जीव है जो संकट के समय एक होने की बजाय अलग होने में अपनी भलाई समझता है. मुझसे तो अच्छा वो मजदूर है जो इकठ्ठा होकर अपने हक की लड़ाई लड़ता है. वक्त पड़ने पर तख्तो ताज बदल सकता है. पर मैं… अपने हक की लड़ाई में अकेला हूं. टुकड़ो में बंटकर मैं अपने हक की भीख मांगता हूं. मैं भीड़ में रहकर भी अकेला रहता हूं. खुद से बात करता हूं,सच पूछो तो मैं खुद से डरता हूं.

हे प्रभू मेरी इस लेबर दिवस पर तुझसे प्रार्थना है…तू मुझे अगले जनम में लेबर बनाइयों. तब शायद मैं इकठ्ठा होकर अपने हक को ले सकूं. अपनी काग़जी ताकत को असलियत में बदल सकूं. अपने परिवार को दो वक्त की रोटी सम्मान से दे सकूं.प्रभु मेरी प्रार्थना को स्वीकार कर मेरा अगला जनम सफल बनाना, मुझे लेबर बनाना.

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