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मणिपुर में इबोबी को चौथी बार सीएम बनने से रोक पायेगी भाजपा ?

इम्फाल। मणिपुर में क्या इबोबी सरकार चौथी बार सत्ता में आ पायेगी ? यह पता तो चलेगा 11 मार्च को। लेकिन 9 मार्च, गुरुवार शाम तक एक्ज़िट पोल आने पर इशारा मिल जायेगा। शाम साढ़े पाँच बजे बोल बिंदास आपको बतायेगा मतदान से क्या इशारे मिले हैं।
इकराम इबोबी गत तीन चुनावों से कांग्रेस को विजय दिला कर मणिपुर में सरकार बना रहे हैं। पिछले चुनाव तक कांग्रेस के मुकाबले विपक्ष बिखरा हुआ था और भारतीय जनता पार्टी इस राज्य में हाशिये पर खड़ी पार्टी थी। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां की दोनों संसदीय सीटें कांग्रेस के ही खाते में आयी थीं।
लेकिन असम में सरकार बनाने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के राज्यों में जनाधार बढ़ाने और सत्ता प्राप्त करने की रणनीति बनायी। फिलहाल पूर्वोत्तर में असम, अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड में भाजपा सत्ता में है। इस आधार पर भाजपा ने नॉर्थ-ईस्ट डेमोक्रोटिक अलायंस बनाया है।
भाजपा ने मणिपुर के लिए केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर, राम माधव, रामलाल आदि को सूरमाओं को लगाया। इसका नतीजा मणिपुर के विधानसभा चुनावों में दिखने की उम्मीद की जा रही है।
मणिपुर में विधानसभा की कुल 60 सीटें हैं। इसमें मुख्यत: दो क्षेत्र हैं, एक इम्फाल का घाटी क्षेत्र और दूसरा पहाड़ी क्षेत्र। घाटी में 40 सीटें और पहाड़ों में 20 सीटें हैं।
मणिपुर की 31 लाख की आबादी में 63 फीसदी मैइती समुदाय को लोग हैं जो हिंदू हैं और घाटी क्षेत्र में रहते हैं। दो अन्य प्रमुख जनजातियाँ नगा और कूकी हैं। ये पहाड़ों में हैं। इनकी आबादी 35 फीसदी है। मुख्यमंत्री इकराम इबोबी स्वयं मैइती समुदाय से हैं। लेकिन मोदी लहर के बाद भाजपा ने इस समुदाय में सेंध मारी हैं।
मणिपुर में सत्ता पर मैइती समुदाय के प्रभुत्व के कारण नगा जनजाति कांग्रेस के ख़िलाफ़ है। नगालैंड में भाजपा की सत्ता में साझेदारी के कारण आमतौर पर नगा समुदाय में भाजपा की पकड़ है। मुख्यमंत्री इबोबी ने कूकी समुदाय को साथ लेने के लिए हाल ही में सात नये ज़िले बनाये जिससे नगा समुदाय नाराज़ है और कूकी समुदाय की बरसों पुरानी माँग पूरी हुई है।
मणिपुर में नगा संगठनों की ओर से 1 नवंबर, 2016 से शुरू आर्थिक नाकेबंदी भी चुनाव में एक बड़ा मुद्दा है। यह नाकेबंदी इबोबी सरकार द्वारा तीन नये विधेयकों को पारित करने के ख़िलाफ़ है। इन विधेयकों के अनुसार बाहरी लोगों को मणिपुर में आने के लिए राज्य के अधिकारियों की अनुमति लेनी होगी। नगा इसे अपने ख़िलाफ़ मान रहे हैं क्योंकि उनकी अधिकांश रिश्तेदारियाँ अन्य राज्य नगालैंड में है। इन मुद्दों के बीच कांग्रेस और भाजपा अपनी-अपनी जीत सुनिश्चित करने की जुगत में हैं। इनके अलावा एनसीपी, टीएमसी, जदयू, आप जैसी पार्टियोंका गठबंधन भी स्वयं को आज़मा रहा है। मणिपुर की दो स्थानीय पार्टियाँ और नगा पीपुल्स फ्रंट भी मैदान में दमखम के साथ है।

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