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एमसीडी चुनाव 2017: फिर आने लगे जनता को केजरी के फोन कॉल्स, इसबार कोई नया वादा नहीं

नमस्कार, मैं अरविंद केजरीवाल बोल रहा हूं. दिल्ली एमसीडी चुनावों के मद्देनजर एक बार फिर दिल्ली के सीएम केजरीवाल के फोन कॉल आने शुरू हो गए हैं. कमाल की बात ये है कि इस एक मिनट की कॉल में उन्होंने कोई नया वादा नहीं किया है.
शायद दो साल में केजरीवाल समझ गए हैं कि वादा करना जितना आसान है, उन्हें निभाना उतना ही मुश्किल.
केजरीवाल क्यों कर रहे हैं फोन?
केजरीवाल फोन पर पिछले दो साल में किए अपने दो कामों की बात कर रहे हैं. ये दो काम हैं-बिजली और पानी.
लेकिन केजरीवाल जी ये भूल गए कि सिर्फ पानी और बिजली से दुनिया नहीं चलती. जरा अपने मोहल्ला क्लीनिक की हालत देखिए. ये आपके वादों पर खरे नहीं उतरते.
केजरीवाल सरकार ने 1000 मोहल्ला क्लीनिक की बात थी. लेकिन दो साल निकल जाने के बावजूद अभी सिर्फ 155 क्लीनिक ही खुल पाए हैं. इस हिसाब से 5 साल में 1000 मोहल्ला क्लीनिक खुलने का वादा पूरा नहीं हो सकेगा.
वादा पूरा न करने की कई वजहें
केजरीवाल हमेशा यही कहते हैं कि एलजी से परमिशन नहीं मिला या केंद्र ने टांग अड़ा दी. लेकिन जमीनी हकीकत ऐसी है जो केजरीवाल के खोखले वादों की पोल खोलती है. केजरीवाल के क्लीनिक की सच्चाई का अंदाजा आप इस घटना से लगा सकते हैं.
मामला दिल्ली के बेगमपुर गांव का है. मैं कुछ दवाएं लेने एक दुकान पर गई तो देखा दुकानदार एक औरत और उसकी 7-8 साल की बच्ची को झिड़क कर दुकान से बाहर निकाल रहा था. दुकानदार का कहना था कि वह बिना पर्चे का दवा नहीं दे सकता है.
उस महिला से बात करने पर पता चला कि सरकारी अस्पताल के डॉक्टर ने बिना किसी चेकअप के दवा दे दी. तीन दिन दवा खिलाई पर बुखार जा ही नहीं रहा.
बच्ची को छूकर देखा तो तप रही थी. मैंने उसे किसी प्राइवेट क्लीनिक के डॉक्टर का नाम बताया, उसने छूटते ही उसकी फीस पूछी.
मैंने बताया, दवा मिला कर 100 रुपए. तब जाकर उसे तसल्ली हुई. यह सिर्फ एक घटना नहीं है. हर दिन रोज ऐसी घटनाएं होती हैं.
मोहल्ला क्लीनिक की कमी से बिगडे़ हालात
केजरीवाल सरकार ने 1000 मोहल्ला क्लीनिक की बात थी. लेकिन अभी तक वो अपना वादा पूरा नहीं कर पाए हैं. इसका खामियाजा गरीब जनता को झेलना पड़ रहा है. दिल्ली में ऐसे कई इलाके हैं जहां अभी मोहल्ला क्लीनिक खोलने की सुगबुगाहट नहीं हुई है. अब देखना है कि केजरीवाल दिल्ली में 1000 मोहल्ला क्लीनिक खोलने का वादा कब पूरा करते हैं.
एमसीडी चुनाव सिर पर है. ऐसे में केजरीवाल को अपनी पीठ थपथपाने के बजाय अपनी योजनाओं को सही ढंग से चलाने पर जोर देना होगा.

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